Jharkhand

JSSC CGL Scam में नया ट्विस्ट! Webel-ICN के साथ शामिल था दूसरा सिंडिकेट? 20 से ज्यादा भर्तियां CID के रडार पर

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): JSSC CGL नियुक्ति घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी दिलाने वाले नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं. अब CID की SIT को एक ऐसे नए सिंडिकेट के बारे में जानकारी मिली है, जिसके जरिए 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों को कथित तौर पर गलत तरीके से सरकारी नौकरी दिलाए जाने का शक है. खास बात यह है कि इनमें कई अभ्यर्थी नौकरी हासिल करने के बाद अलग-अलग सरकारी विभागों में तैनात भी बताए जा रहे हैं. नए नेटवर्क की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. CID अब इस सिंडिकेट के पीछे मौजूद लोगों, अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य किरदारों की भूमिका खंगाल रही है. परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों वेबेल, बिंसिस और ICN से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है.

नए सुराग मिलने के बाद CID ने वेबेल और ICN से जुड़े कर्मचारी सोमांश कुमार और राहुल प्रकाश की पुलिस रिमांड तीन दिनों के लिए और बढ़ा दी है. दोनों आरोपियों से पहले पांच दिनों तक पूछताछ की जा चुकी है. उन्हें बुधवार को जेल भेजा जाना था, लेकिन जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने के बाद CID ने दोनों से अतिरिक्त पूछताछ की मांग की. दोनों को 27 अगस्त को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. अब जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि नए सिंडिकेट का नेटवर्क किस तरह काम करता था और इसमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कितने लोग शामिल थे.

जांच एजेंसी का मुख्य फोकस अब उन अभ्यर्थियों की पहचान पर है, जिन्हें कथित तौर पर इस नेटवर्क की मदद से सरकारी नौकरी मिली. CID यह भी जांच रही है कि इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा में किस तरह सफलता हासिल की और इसके पीछे किसी संगठित व्यवस्था की भूमिका थी या नहीं. अब तक इस मामले में 200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. वहीं, करीब 27 आरोपियों को जेल भेजे जाने की जानकारी है. इनमें परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों से जुड़े लोग भी शामिल हैं. बुधवार को भी रांची समेत कुछ अन्य जिलों में 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई. पिछले दो दिनों में करीब 50 अभ्यर्थियों से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है.

CID सूत्रों के अनुसार, कुंदन कुमार नाम के एक अभ्यर्थी से पूछताछ के दौरान नए सिंडिकेट को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली. बताया जा रहा है कि कुंदन ने खुद परीक्षा में सफलता हासिल की थी. जांच में यह बात सामने आई कि उसने अपने भाई समेत 20 से ज्यादा अन्य अभ्यर्थियों को कथित तौर पर नौकरी दिलाने में मदद की. एजेंसी को आशंका है कि यह नेटवर्क एक अलग सिंडिकेट के तौर पर काम कर रहा था. हालांकि, इसका अभय तिवारी से जुड़े कथित नेटवर्क के साथ कोई सीधा संबंध है या नहीं, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी जांच कर रही है. वहीं CID अभय तिवारी और उससे जुड़े लोगों के वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है. जांच एजेंसी का फोकस मनी ट्रेल के जरिए यह पता लगाने पर है कि कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों का लेनदेन किन लोगों के बीच हुआ. JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में आरोपी पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की जमानत याचिका पर बुधवार को CID की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो गई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब 5 सितंबर को उनकी जमानत पर फैसला सुनाया जाएगा. इसी मामले में आरोपी अभय तिवारी की जमानत याचिका पर भी CID की ओर से बहस पूरी हो चुकी है. ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों मामलों में अदालत के फैसले पर भी नजर रहेगी.