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Jharkhand

झारखंड आंदोलनकारियों का बड़ा सवाल : बिहार में जेपी आंदोलनकारियों को 30 हज़ार तो झारखंड एक्टिविस्ट को 3500 ही क्यों? 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क: दिशोम  गुरु शिबू सोरेन  अब नहीं रहे, विनोद बाबू का तो पहले ही निधन हो गया था.  एके  राय भी अब दुनिया छोड़ चुके है.  आंदोलनकारियों  ने लड़कर झारखंड लिया, जेल में रहे, परिवार से अधिक उन लोगों ने झारखंड के लिए काम किया.  नतीजा हुआ कि झारखंड अलग राज्य बना , लेकिन झारखंड आंदोलन के पेंशन भोगी आज भी संघर्ष कर रहे है.  झारखंड आंदोलनकारी जगत महतो के अनुसार सरकार का झारखंड के आंदोलनकारियो  पर ध्यान नहीं है.  उनके मुताबिक बिहार में 6 महीने से अधिक जेल में रहने वाले लोगों को₹30,000 प्रति महीने  पेंशन की राशि मिलती है.  पहले यह राशि 15,000 मिलती थी.  जिसे बढ़ाकर  30,000 कर दिया गया है.  

उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में भी राशि बहुत अधिक है 

झारखंड के साथ ही उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ भी बने थे.  वहां के आंदोलनकारियों  को फिलहाल प्रति महीने ₹10,000 पेंशन मिलती है.  लेकिन झारखंड में अभी भी ₹3500 पेंशन मिलती है. जगत महतो  के अनुसार धनबाद में लगभग 300 पेंशन पाने वाले लोग हैं, जबकि पूरे झारखंड में 20,000 से अधिक लोग हो सकते हैं.  झारखंड में  जब रघुवर दास की सरकार थी, तो पेंशन भुगतान शुरू किया गया था.  उस समय₹3000 राशि निर्धारित की गई थी.  बाद में जब 2019 में हेमंत सोरेन की सरकार आई, तो इस राशि में ₹500 की बढ़ोतरी की गई.  यानी ₹3500 मिलने लगा.  हालांकि यह  राशि नियमित नहीं मिल रही है.  कभी-कभी दो-तीन महीना की राशि एक साथ दी जा रही है.  इसको लेकर भी झारखंड के आंदोलनकारियों  में नाराजगी है.  बिहार में जब जयप्रकाश आंदोलन के आंदोलनकारियों  को ₹30,000 का भुगतान किया जा रहा है, तो बिहार के छोटे भाई झारखंड में यह  राशि ₹3500 ही क्यों ?और वह भी रेगुलर नहीं.  

झारखंड आंदोलनकारी लगातार उठा रहे सवाल 

इसको लेकर पेंशन भोगी अब बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं.  झारखंड के कई पेंशन भोगियों की आर्थिक स्थिति सही नहीं है.  वह लोग पेंशन के भरोसे जीवन यापन कर रहे हैं.  पिछले साल जब बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने आंदोलनकारी की पेंशन राशि में बढ़ोतरी की, जिससे आंदोलनकारी के परिवार को बड़ी राहत मिली है.  बात-बात में झारखंड के आंदोलनकारी का दर्द छलक रहा है.  झारखंड के अलग-अलग जिलों में बैठक हो रही हैं.  डिमांड किये  जा रहे हैं.  उनका कहना है कि झारखंड राज्य के निर्माण में आंदोलनकारियों  का योगदान ऐतिहासिक रहा है.  उनके संघर्ष और बलिदान को देखते हुए सम्मानजनक पेंशन, बेहतर चिकित्सा सुविधा, रेलवे यात्रा में रियायत और बीमा सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए.