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Jharkhand

JPSC PT परीक्षा में 15.90 लाख रुपये में हुई थी डील, UPI-RTGS के जरिए ट्रांसफर की गई थी रकम

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान CID को कई अहम सुराग मिले हैं. जांच में अभ्यर्थी सुमन सौरव उर्फ सौरव सुमन के परिवार से जुड़े बैंक खातों से कथित बिचौलिए पवन कुमार सिंह के खाते में करीब 15.90 लाख रुपये भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. यह रकम UPI और RTGS के जरिए ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है. CID अब इस वित्तीय लेन-देन को परीक्षा में कथित सौदेबाजी की अहम कड़ी मानकर जांच कर रही है.

जांच एजेंसी के अनुसार, सुमन सौरव ने परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए पवन कुमार सिंह से संपर्क किया था. इसके लिए कथित तौर पर 80 लाख रुपये की मांग की गई थी. जांच में करीब 16 लाख रुपये के भुगतान का ट्रेल मिलने की बात सामने आई है. अब जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि कथित भुगतान के बाद परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड में किसी तरह का बदलाव किया गया था या नहीं.

कैंडिडेट कॉपी और मूल OMR में बड़ा अंतर
मामले में OMR शीट को लेकर भी जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण अंतर मिला है. CID के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आई सुमन सौरव की कैंडिडेट या कार्बन कॉपी में पेपर-2 के केवल 48 उत्तर दर्ज थे. दूसरी ओर, JPSC के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित मूल OMR और TDPL के सर्वर से प्राप्त स्कैन कॉपी में 99 उत्तर दर्ज पाए गए. इस तरह दोनों रिकॉर्ड की तुलना में कुल 51 उत्तरों का अंतर सामने आया है. CID के अनुसार, कैंडिडेट कॉपी में जिन प्रश्नों को खाली छोड़ा गया था, उन्हीं स्थानों पर मूल OMR में अतिरिक्त उत्तर दर्ज मिले. यही अंतर जांच के लिए महत्वपूर्ण बन गया है. हालांकि, OMR में कथित तौर पर बदलाव किस स्तर पर और किसके जरिए हुआ, इसे लेकर जांच अभी जारी है.

WhatsApp चैट की भी हो रही जांच
CID ने मामले में बैंक ट्रांजैक्शन के साथ डिजिटल बातचीत को भी जांच के दायरे में रखा है. जांच एजेंसी ने सुमन सौरव और पवन कुमार सिंह के बीच हुई कथित WhatsApp चैट का उल्लेख किया है. इसके अलावा पप्पू कुमार के साथ हुई बातचीत को भी जांच में अहम माना गया है. एजेंसी इन चैट के जरिए कथित संपर्क, पैसों के लेन-देन और परीक्षा में सफलता दिलाने के दावे के बीच संबंध तलाश रही है.

उम्मीदवारों को सेट करने की कथित डील
जांच में जनवरी 2026 में उम्मीदवारों को कथित तौर पर परीक्षा में सेट कराने से जुड़ी एक डील का भी उल्लेख हुआ है. आरोपी बुद्धेश्वर भगत के इकबालिया बयान के अनुसार, अभय कुमार तिवारी ने JPSC परीक्षा के लिए उम्मीदवार उपलब्ध कराने को कहा था. जांच में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए करीब एक करोड़ रुपये और SC/ST उम्मीदवार के लिए 80 लाख रुपये तक की कथित दर तय होने की बात सामने आई है. बुद्धेश्वर भगत को प्रति उम्मीदवार पांच लाख रुपये कमीशन देने का आश्वासन मिलने का भी उल्लेख है.

लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की सूची
CID की जांच में बुद्धेश्वर भगत के जब्त लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने की बात कही गई है. एजेंसी अब इन अभ्यर्थियों और कथित नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है. इसके साथ ही परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया को लेकर भी सवालों की जांच हो रही है. केस डायरी में JPSC की डिप्टी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता द्वारा TDPL के एक कर्मचारी को झारखंड सिविल सर्विस PT की कथित आंसर-की WhatsApp के जरिए भेजे जाने का उल्लेख है. वहीं, एक एजेंसी के कंप्यूटर से FRO मेन्स की उत्तरपुस्तिका मिलने की बात भी जांच में सामने आई है. इस मामले में आरोपी 29 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है. CID अब मनी ट्रेल, OMR रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों को जोड़कर कथित गड़बड़ी की पूरी कड़ी खंगाल रही है. फिलहाल 15.90 लाख रुपये के लेन-देन और OMR में मिले 51 उत्तरों के अंतर ने जांच को एक अहम दिशा दी है.