Jharkhand

अतिक्रमण मुक्त हुई रांची नगर निगम की 27 एकड़ जमीन, अब बनेगा वेंडिंग जोन

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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रांची (RANCHI): राजधानी में चल रही वर्षों से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही रांची नगर निगम की जमीन अब शहर के विकास में उपयोग की जाएगी. नगर निगम ने पिछले एक साल में कई महत्वपूर्ण निगम संपत्तियों और भूखंडों को अतिक्रमणमुक्त कराने के बाद उनके सीमांकन, अभिलेखीकरण और संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. निगम के अनुसार, जिन प्रमुख भूखंडों का क्षेत्रफल स्पष्ट रूप से उपलब्ध है, उनका कुल रकबा करीब 26.96 एकड़ यानी लगभग 27 एकड़ है. इनमें एदलहातू की करीब 4.8 एकड़, कुसुम बिहार की 78.65 डिसमिल, करमटोली तालाब की 51 डिसमिल, ग्वाला टोली डोरंडा की 1.20 एकड़ और उर्दू स्कूल थड़पखना की 31.5 डिसमिल जमीन शामिल है. कुछ अन्य इलाकों में भी कार्रवाई हुई है, लेकिन वहां की भूमि का क्षेत्रफल अलग से उपलब्ध नहीं कराया गया है.

निगम ने बताया कि बड़ा घाघरा में करीब 2.80 एकड़, डोरंडा मानिटोला में पांच एकड़, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल, डोरंडा बाजार में करीब एक एकड़ और बूटी मोड़ चौक में लगभग 0.44 एकड़ भूमि को भी अतिक्रमणमुक्त कराया गया है. सीमांकन के बाद कई स्थानों पर बाउंड्री निर्माण का काम चल रहा है, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके. इसके अलावा तुपुदाना में एनआइएफटी के पास, कांटाटोली बस स्टैंड, बड़गाई और बाधगाड़ी समेत अन्य क्षेत्रों में भी निगम और सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई है. निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर में बाउंड्री निर्माण कराया जा रहा है.

अतिक्रमणमुक्त जमीन को खाली छोड़ने के बजाय शहर की जरूरतों के अनुसार उपयोग करने की तैयारी है. निगम के अनुसार, मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का प्रस्ताव है. इससे फुटपाथ और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोगों को निर्धारित स्थान मिल सकेगा और यातायात व्यवस्था भी बेहतर करने में मदद मिलेगी. वहीं, दैनिक मजदूरों के लिए डोरंडा बाजार और लोआडीह में लेबर चौक विकसित किया गया है. निगम की अन्य जमीनों पर लाइब्रेरी, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं और स्वच्छता व अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने की योजना है. निगम का जोर जमीन की सुरक्षा के साथ उसका बेहतर सार्वजनिक उपयोग सुनिश्चित करने पर है.