रामगढ़(RAMGARH): मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का अंतिम क्रिया-कर्म अब समाप्त हो गया है. इस बीच एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें गांडेय विधायक कल्पना सोरेन मिट्टी के चूल्हे पर पारंपरिक भोजन बनाती नजर आ रही हैं. उनके आसपास घर के बड़े-बुजुर्ग सभी रीति-रिवाजों को निभाने के लिए बैठे हुए हैं.
इससे पहले भी कल्पना सोरेन बहू के रूप में अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और परंपराओं का बखूबी पालन करती नजर आई हैं. चाहे अंतिम क्रिया-कर्म के दौरान रस्में निभाना हो या इस मुश्किल घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहना, कल्पना हर कदम पर परिवार का साथ देती दिखी हैं. तस्वीर सामने आते ही इस बात की चर्चा हो रही है कि कल्पना सोरेन एक अच्छी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ मुश्किल घड़ी में अपने परिवार के साथ मजबूती से खड़ी हैं. आज भी अस्थि विसर्जन से पहले कल्पना सोरेन ने पारंपरिक भोजन बनाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपा. इसके बाद हेमंत सोरेन अपने पुत्र धर्म का निर्वहन करने में जुट गए.
नेमरा से अस्थि कलश लेकर पहुंचे रजरप्पा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से मां की अस्थि कलश लेकर रजरप्पा पहुंचे. यहां मां छिन्नमस्तिका मंदिर के पास दामोदर-भैरवी नदी के संगम स्थित जाड्ंग बाहा तुपुनाई घाट पर अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई, इस दौरान परिवार के सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे.
पारंपरिक विधि-विधान से पूरी हुई रस्में
अस्थि विसर्जन की रस्में परगना बाबा जोगेश्वर सोरेन के नेतृत्व में संपन्न कराई गईं. इस दौरान मांझी बाबा बिन्दे सोरेन, लुगू गोडैत, सुरेन्द्र टुडू, पारानीक बाबा महावीर मुर्मू, सोमाय टुडू और जीतलाल मुर्मू समेत कई लोग मौजूद रहे. सभी ने संताली परंपरा के अनुसार धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन कराया.
रस्में पूरी होने के बाद ग्रामीणों को बांटे वस्त्र
अस्थि विसर्जन और उससे जुड़ी सभी पारंपरिक रस्में पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच वस्त्र वितरित किए, पूरे कार्यक्रम के दौरान परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे.