Jharkhand

अब आदिम जनजाति परिवारों को मिलेगी हर महीने पेंशन, जानें पूरी योजना, कौन उठा सकता है लाभ

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड सरकार की ओर से राज्य के आदिम जनजाति परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं. इन्हीं में से एक है मुख्यमंत्री आदिम जनजाति पेंशन योजना. इस योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आर्थिक सहारा देना है, जिन्हें नियमित आय के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. योजना के तहत पात्र परिवार को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके.

2015 में शुरू हुई थी योजना

महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा मुख्यमंत्री आदिम जनजाति पेंशन योजना की शुरुआत 8 जुलाई 2015 को की गई थी. पहले इस योजना को आदिम जनजाति पेंशन योजना के नाम से जाना जाता था. बाद में इसे मुख्यमंत्री आदिम जनजाति पेंशन योजना के रूप में जाना जाने लगा. यह एक परिवार आधारित पेंशन योजना है. इसका मतलब है कि पेंशन किसी एक व्यक्ति के बजाय परिवार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दी जाती है. परिवार में अगर कोई वयस्क विवाहित महिला है, तो उसे योजना का लाभ दिया जाता है. वहीं, ऐसी महिला के नहीं होने पर परिवार के पुरुष मुखिया को पेंशन मिलने का प्रावधान है.

हर महीने मिलते हैं 1000 रुपये

योजना के तहत पात्र लाभार्थी को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है. भुगतान के लिए आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) का इस्तेमाल किया जाता है. सरकार की इस पहल का उद्देश्य आदिम जनजाति परिवारों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपनी जरूरी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े.

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रताएं तय की गई हैं. आवेदक वयस्क और विवाहित महिला होनी चाहिए. साथ ही उसका संबंध राज्य में मान्यता प्राप्त आदिम जनजातीय समूहों में से किसी एक से होना जरूरी है. इनमें असुर, बिरहोर, पहाड़ी-खरिया, कोरवा और माल-पहाड़िया जैसी जनजातियां शामिल हैं. इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के पास ऐसी सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की नियमित नौकरी नहीं होनी चाहिए, जिससे स्थायी वेतन मिलता हो. आवेदक को किसी दूसरी समान पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा होना चाहिए. उदाहरण के लिए, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन या इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ लेने वाले व्यक्ति इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे.

विवाहित महिला नहीं होने पर पुरुष मुखिया को लाभ

इस योजना की एक खास बात यह है कि परिवार में अगर कोई वयस्क विवाहित महिला नहीं है, तो ऐसी स्थिति में परिवार के पुरुष मुखिया को पेंशन दी जा सकती है. यानी योजना का लाभ केवल महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की परिस्थिति के अनुसार पुरुष मुखिया भी इसके दायरे में आ सकता है.

कैसे करें आवेदन?

इस योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑफलाइन है. इच्छुक आवेदक को अपने क्षेत्र के खंड विकास अधिकारी (ग्रामीण क्षेत्र) या क्षेत्रीय अधिकारी (शहरी क्षेत्र) के कार्यालय में जाना होगा. वहां से निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र प्राप्त किया जा सकता है.

आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद पासपोर्ट साइज फोटो लगानी होगी और आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करनी होंगी. इसके बाद निर्धारित समय सीमा, यदि लागू हो, के भीतर आवेदन संबंधित अधिकारी के पास जमा करना होगा. आवेदन जमा करने के बाद आवेदक को रसीद या पावती जरूर लेनी चाहिए. इसमें आवेदन जमा करने की तारीख, समय और उपलब्ध होने पर आवेदन की विशिष्ट पहचान संख्या दर्ज होनी चाहिए.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

योजना के लिए आवेदन करते समय कुछ दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है. इनमें जाति प्रमाण पत्र, वोटर आईडी की फोटोकॉपी, परिवार सदस्यता प्रमाण पत्र, आधार कार्ड या आधार नहीं होने की स्थिति में स्व-घोषणा और बैंक पासबुक की फोटोकॉपी प्रमुख हैं. इस योजना के जरिए झारखंड सरकार आदिम जनजाति परिवारों को नियमित आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है. पात्र परिवार आवेदन से पहले अपनी योग्यता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी संबंधित कार्यालय से जरूर जांच लें.