Jharkhand

पलामू: दमदमी माइंस हादसे के 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

Rashmi Prasad CE
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पलामू: दमदमी माइंस हादसे के 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

पलामू (PALAMU): जिले के हुसैनाबाद स्थित दमदमी माइंस के जलभराव वाले अवैध खनन वाले गड्ढे में युवक लवकुश कुमार की डूबने से हुई मौत को 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक दोषी माइंस संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. हादसे के बाद अंचल अधिकारी द्वारा प्राथमिकी तो दर्ज कराई गई, परंतु पुलिस प्रशासन की सुस्ती के कारण किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और निगरानी व्यवस्था के अभाव में ये गहरे गड्ढे अब स्थानीय निवासियों के लिए "मौत के कुंड" बन चुके हैं, जिससे जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए है और कार्रवाई की मांग की है.  उनका कहना है कि जब ग्रामीणों ने माइंस की अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन किया था, तब प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुखिया पति समेत दस लोगों पर केस दर्ज कर तीन को जेल भेज दिया था, लेकिन एक युवक की जान जाने के बाद भी प्रभावशाली खनन माफियाओं पर नरमी बरती जा रही है. इस बीच, जिला खनन विभाग और खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) की तकनीकी जांच टीम का अभी तक घटनास्थल पर न पहुंचना भी सुरक्षा मानकों की निगरानी करने वाली एजेंसियों की संदेहास्पद भूमिका को उजागर करता है.

इस गंभीर मुद्दे को झारखंड के पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष उठाया है. उन्होंने अवैध खनन, लीज समाप्त होने के बाद भी हो रहे उत्खनन और विस्फोटक सामग्री के अवैध परिवहन की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा तब तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है. पीड़ित परिवार आज भी न्याय और प्रशासनिक सहायता के लिए भटक रहा है. यदि समय रहते इन असुरक्षित गड्ढों की घेराबंदी नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोक पाना नामुमकिन होगा.