पलामू(PALAMU): पलामू के विश्रामपुर में कई सालों से बंद पड़ी ग्रेफाइट माइंस अब फिर से चालू होने की तैयारी में है. झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JSMDC) और खान विभाग ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो करीब 4 हजार लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है.
यह माइंस साल 2012 के बाद से बंद पड़ी है. इसकी सबसे बड़ी वजह वन और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी नहीं मिलना रही. अब विभाग जरूरी अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द यहां दोबारा खनन शुरू किया जा सके.
इस माइंस की लीज साल 1976 में दी गई थी और फिलहाल यह 2026 तक वैध है. अब इसकी लीज बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है.
पूरे लीज क्षेत्र का आकार 223.44 हेक्टेयर है, लेकिन शुरुआत में सिर्फ 25 हेक्टेयर में ही खनन किया जाएगा. इसमें ब्लॉक-1 और ब्लॉक-3 को शामिल किया गया है. विभाग का मानना है कि छोटे क्षेत्र से शुरुआत करने पर काम जल्दी शुरू हो जाएगा और जरूरी मंजूरियां भी आसानी से मिल जाएंगी.
इस इलाके में करीब 2.73 लाख टन ग्रेफाइट का भंडार है. अगर योजना के मुताबिक खनन शुरू हुआ तो हर साल करीब 30 हजार टन से ज्यादा ग्रेफाइट निकाला जा सकेगा. इस हिसाब से करीब सात साल तक यहां खनन किया जा सकता है.
पूरे वन क्षेत्र में एक साथ खनन शुरू करने पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. लेकिन फिलहाल सिर्फ 25 हेक्टेयर में काम शुरू करने से यह खर्च घटकर करीब 1.5 करोड़ रुपये रह जाएगा. इससे परियोजना जल्दी शुरू होगी और लोगों को रोजगार मिलने का रास्ता भी साफ होगा.
खान विभाग का कहना है कि इस परियोजना को दोबारा शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. माइंस चालू होने से न सिर्फ पलामू की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि आसपास के हजारों परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
