Jharkhand

पाकुड़ में मनरेगा पर उठे सवाल, 3 साल बाद भी अधूरा कुआं, 1.44 लाख की निकासी फिर भी पोर्टल पर ‘Photo Not Available’

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

पाकुड़ (PAKUR): पाकुड़ के हिरणपुर प्रखंड की मंझलाडीह पंचायत के रघुनाथपुर गांव में मनरेगा योजना के तहत बन रहे सिंचाई कूप को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि वर्ष 2023 में स्वीकृत योजना का काम तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अधूरा है, जबकि सरकारी पोर्टल पर योजना का काम अब भी जारी दिख रहा है. वहीं, योजना से जुड़ी तस्वीरों के स्थान पर पोर्टल पर ‘Photo Not Available’ दर्ज है.

2023 में मिली थी योजना की मंजूरी
जानकारी के मुताबिक, लखीराम मुर्मू की जमीन पर सिंचाई कूप निर्माण की योजना को 28 अप्रैल 2023 को मंजूरी मिली थी. पोर्टल पर 20 मई 2023 से काम शुरू होने की जानकारी दर्ज है. योजना की अनुमानित लागत करीब 3 लाख 95 हजार रुपये बताई गई है. मनरेगा पोर्टल पर इस योजना के तहत अब तक 547 पर्सन-डेज दर्ज किए गए हैं. वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 1.44 लाख रुपये की राशि की निकासी भी हुई है. इसके बावजूद ग्रामीण स्तर पर कुआं अधूरा बताया जा रहा है.

पोर्टल पर तस्वीरों की जगह ‘Photo Not Available’
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल योजना की ऑनलाइन जानकारी को लेकर उठ रहा है. मनरेगा पोर्टल पर काम शुरू होने से पहले और निर्माण के दौरान अपलोड की जाने वाली तस्वीरों के स्थान पर ‘Photo Not Available’ लिखा हुआ है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि योजना में वास्तविक रूप से कितना काम हुआ और दर्ज किए गए कार्यदिवस के मुताबिक मजदूरों ने कितना काम किया.

जांच की मांग, जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की ओर से अब मामले की जांच की मांग उठ रही है. सवाल यह है कि जब योजना को स्वीकृति मिले तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, तो सिंचाई कूप अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ. साथ ही, पोर्टल पर तस्वीरें उपलब्ध नहीं होने और मजदूरों के नाम पर दर्ज पर्सन-डेज के आधार पर हुई भुगतान प्रक्रिया की भी जांच की मांग की जा रही है. लोगों का कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि योजना में वास्तव में कितना काम हुआ, कितनी राशि खर्च या निकाली गई और निर्माण कार्य अधूरा रहने की वजह क्या है. इसके साथ ही पंचायत स्तर से लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए.

रिपोर्ट: विकास कुमार