पाकुड़(PAKUR): श्मशान की जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. एक पक्ष पर श्मशान की जमीन बताकर दूसरे की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. पूरा मामला मौजा पाकुड़ नंबर 128 की जमीन से जुड़ा है. विवाद की सबसे बड़ी वजह दो अलग-अलग प्लॉट नंबर बताए जा रहे हैं. एक पक्ष प्लॉट नंबर 2054 का जिक्र कर रहा है, जबकि जमीन मालिक का दावा है कि उसकी जमीन प्लॉट नंबर 2056 में है.
अब मामला पुलिस के बाद प्रशासन तक पहुंच गया है. विवाद की जांच SDO स्तर से कराए जाने की बात सामने आई है. ऐसे में जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेज और वास्तविक स्थिति क्या है.
2023 में भी सामने आया था जमीन का विवाद
बताया जा रहा है कि इस जमीन को लेकर विवाद पहली बार वर्ष 2023 में सामने आया था. उस समय सिंधी समाज की ओर से थाने में आवेदन देकर संबंधित जमीन को लेकर दावा किया गया था.
इसके बाद थाना स्तर पर जमीन से जुड़े कागजात और प्लॉट नंबर की जांच की गई थी. जांच में जमीन के अलग-अलग प्लॉट नंबर में दर्ज होने की बात सामने आने के बाद उस समय निर्माण कार्य रोक दिया गया था.
अब करीब तीन साल बाद एक बार फिर उसी इलाके में जमीन को लेकर विवाद सामने आया है.
चारदीवारी बनाने के दौरान फिर बढ़ा विवाद
15 सितंबर को एक जमीन पर चारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा था. इसी दौरान सिंधी समाज की ओर से थाने में आवेदन दिया गया. आवेदन में प्लॉट नंबर 2054 का जिक्र किया गया.
दूसरी तरफ जमीन मालिक का दावा है कि जिस जगह चारदीवारी बनाई जा रही थी, वह प्लॉट नंबर 2054 नहीं बल्कि 2056 है. जमीन मालिक की ओर से अपने दावे के समर्थन में सरकारी अमीन से कराई गई नापी से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए गए हैं.
इसी बीच निर्माणाधीन चारदीवारी को तोड़े जाने की बात भी सामने आई. बाद में जब दोबारा निर्माण शुरू किया गया तो पुलिस मौके पर पहुंची और काम रुकवा दिया.
एसडीओ स्तर की जांच से साफ होगी स्थिति
पुलिस ने जमीन मालिक को थाने बुलाकर जमीन से जुड़े दस्तावेज और पूरे मामले की जानकारी देने को कहा. इसके बाद विवाद पुलिस अधीक्षक तक भी पहुंचा. अब मामले की जांच एसडीओ स्तर से कराए जाने की बात सामने आई है.
फिलहाल विवाद की असली वजह प्लॉट नंबर 2054 और 2056 है. दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं.
ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड, पुरानी नापी, सरकारी अमीन की रिपोर्ट, पहले हुई पुलिस जांच और मौके की वास्तविक स्थिति के मिलान के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी. वर्ष 2023 में सामने आया विवाद अब 2026 में फिर उठने के बाद लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है.
रिपोर्ट - विकास कुमार