कोडरमा (KODERMA): कोडरमा से शिक्षा व्यवस्था कि एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरे व्यवस्था की पोल खोल दी और सवाल भी खड़े हो गए है. मामला सतगावां का है जहां के एक सरकारी स्कूल मे 2900 छात्रों को पढ़ने के लिए सिर्फ 8 ही शिक्षक है और इसी बात से परेशान छात्र स्कूल छोड़ अब सड़क पर उतर गए और ब्लॉक मुख्यालय का घेराव कर दिया.
क्या है पूरा मामला
मामला सतगावां प्रखंड के राज्य संपोषित +2 उच्च विद्यालय बासोडीह की है जहां स्कूल की खराब व्यवस्था को देखते हुए छात्रों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा है. जहां छात्रों के हाथ मे किताब और कॉपी होनी चाहिए थी वही उनके पास सवाल है कि अगर व्यवस्था ठीक नहीं हुई तो हम पढ़ेंगे कैसे.
बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़कर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर सतगावां प्रखंड मुख्यालय पहुंचे. यहां छात्रों ने धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई.
2900 छात्रों पर सिर्फ 8 शिक्षक
स्कूल में 9वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होती है. यहां साइंस और आर्ट्स दोनों विषयों की पढ़ाई कराई जाती है. लेकिन करीब 2900 छात्रों के लिए स्कूल में सिर्फ 8 शिक्षक हैं. ऐसे में एक शिक्षक पर बड़ी संख्या में छात्रों को संभालने की जिम्मेदारी है.
छात्रों का कहना है कि कई जरूरी विषयों के शिक्षक स्कूल में मौजूद नहीं हैं. इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है. परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
लैब और लाइब्रेरी की भी हालत खराब
छात्रों ने स्कूल की दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि स्कूल की लैब में ताला लगा रहता है और लाइब्रेरी में भी पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक सीमित होकर रह गई है. छात्रों ने स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि बारिश के दिनों में सड़क पर कीचड़ हो जाता है, जिससे आने-जाने में काफी परेशानी होती है.
छात्रों ने जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव के समय सभी वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन स्कूल की समस्याओं को देखने के लिए नियमित रूप से कोई नहीं आता.
प्रशासन ने दिया आश्वासन
छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रखंड प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना. प्रशासन की ओर से छात्रों को भरोसा दिया गया कि शिक्षकों की कमी और स्कूल की दूसरी समस्याओं से जुड़े मामलों को जिला शिक्षा पदाधिकारी और उपायुक्त तक पहुंचाया जाएगा.
रिपोर्ट- अरुण बर्नवल