Jharkhand

कोडरमा: रेल परियोजना मुआवजा घोटाला, लाभुकों से कमीशन लेने के आरोप, ACB ने कसा शिकंजा

Rashmi Prasad CE
Copy Editor
कोडरमा: रेल परियोजना मुआवजा घोटाला, लाभुकों से कमीशन लेने के आरोप, ACB ने कसा शिकंजा

कोडरमा (KODERMA): रांची रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. इसी को लेकर कोडरमा के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी शारदानंद देव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिनमें लाभुकों को मुआवजा राशि देने में गड़बड़ी और उनसे 10 से 25 प्रतिशत तक कमीशन लेने के आरोप शामिल हैं.

एसीबी के अनुसार, जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि शारदानंद देव ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की हो सकती है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक 1 मार्च 2014 से 31 जनवरी 2016 के बीच उनकी कुल वैध आय 16.47 लाख रुपये थी, जबकि इसी अवधि में उनके खर्च और निवेश का आंकड़ा 90.27 लाख रुपये तक पहुंच गया. एजेंसी का मानना है कि आय और व्यय के बीच यह बड़ा अंतर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है.

आपको बता दें, इस मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवजे में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं. शिकायतों के आधार पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के दौरान कुश्मा देवी नामक एक महिला ने आरोप लगाया कि मुआवजा राशि मिलने के बाद बैंक खाता खुलवाने के नाम पर उससे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में उसके खाते से कुछ धनराशि निकाल ली गई. इस आरोप के बाद जांच एजेंसी ने मुआवजा भुगतान प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तार से जांच की. एसीबी का कहना है कि मामले में कई लाभुकों के बयान दर्ज किए गए हैं और बैंकिंग रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है.

जांच के दौरान शारदानंद देव और उनके परिजनों से जुड़े बैंक खातों एवं संपत्तियों की भी जांच की गई. एसीबी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में शारदानंद देव, उनकी पत्नी सुधा देव, कथित पत्नी सुमित्रा देवी तथा अन्य संबंधित खातों में 54 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा की गई. इसी अवधि में परिवार के नाम पर लगभग 20.76 लाख रुपये मूल्य की जमीन खरीदे जाने की जानकारी मिली है. इसके अलावा उनकी बेटी स्मिता देव के नाम पर भी जमीन खरीदने के साक्ष्य सामने आए हैं. जांच में बोकारो के चास क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला मकान का भी पता चला है, जिस पर करीब 75 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. एसीबी अब बैंक लेन-देन, संपत्तियों और कथित कमीशनखोरी के पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.