Jharkhand

कोडरमा में कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं का सड़क मार्च, कई की बिगड़ी तबीयत

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

कोडरमा (KODARMA): सतगावां प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं का स्कूल की कथित अव्यवस्थाओं को लेकर गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया. भोजन की गुणवत्ता, पढ़ाई और विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्राएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रखंड मुख्यालय की ओर निकलीं. मार्च के दौरान गर्मी और थकान के कारण कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई और वे रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़ीं. बीमार छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.

भोजन और पढ़ाई की व्यवस्था पर उठाए सवाल

छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है. इसके साथ ही पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं. छात्राओं का कहना है कि समस्याओं की शिकायत पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों के सामने रखी गई, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. इसी कारण उन्होंने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए सामूहिक रूप से मार्च निकालने का फैसला किया.

शौचालय की सफाई और खाना बनवाने का आरोप

छात्राओं ने विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्था पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि उनसे करीब एक महीने तक शौचालय की सफाई कराई गई. छात्राओं से खाना बनवाने का भी आरोप लगाया गया है. इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग की जा रही है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके.

15 अगस्त को भी सामने आया था विरोध

छात्राओं के मुताबिक, विद्यालय की समस्याओं को लेकर 15 अगस्त को भी नाराजगी सामने आई थी. उस समय प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से व्यवस्था में सुधार का आश्वासन मिलने की बात कही गई थी. छात्राओं का आरोप है कि आश्वासन के बाद भी हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया.

प्रशासन से तत्काल जांच और सुधार की मांग

प्रखंड मुख्यालय पहुंचीं छात्राओं ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं. उनकी प्रमुख मांग है कि विद्यालय की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भोजन की गुणवत्ता तथा शिक्षा व्यवस्था को तत्काल बेहतर किया जाए. इसके साथ ही छात्राओं से कथित तौर पर सफाई और खाना बनवाने के आरोपों की भी जांच हो.

मार्च के दौरान बीमार हुई छात्राओं का इलाज कराया जा रहा है. अब प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि छात्राओं की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं.

रिपोर्ट – अरूण वर्णवाल