☰
Jharkhand

वियतनाम में हादसा, झारखंड में मातम, दोनों युवकों के शव पहुंचते ही मचा कोहराम

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

TNP  डेस्क : वियतनाम में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले जमशेदपुर के विनय कुमार राय और रांची के राजा कुमार वर्मा के शव आखिरकार झारखंड पहुंच गए हैं. कई दिनों से दोनों परिवार अपने बेटों के शव का इंतजार कर रहे थे. रविवार को जब शव घर पहुंचा तो परिवार में मातम पसर गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं.

बेटा का शव देख बिलख उठी  माँ 

सबसे भावुक दृश्य जमशेदपुर के शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर चार में देखने को मिला. रविवार सुबह जैसे ही 24 वर्षीय विनय का शव घर पहुंचा, उसकी मां लग्न देवी अपने बेटे को देखकर टूट गईं. मां ने शनिवार को ही बेटे की लंबी उम्र और सलामती के लिए निर्जला जितिया व्रत रखा था. लेकिन अगले ही दिन जिस बेटे के लिए उन्होंने उपवास किया था, उसी का शव उनकी आंखों के सामने था.बेटे का चेहरा देखते ही मां फूट-फूटकर रोने लगीं. वह बार-बार बेटे को सहलाते हुए कहती रहीं, "बेटा, तुम्हारे लिए उपवास किया है, उठ जाओ." मां की यह पुकार सुनकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं. पिता रमेश राय और परिवार के अन्य सदस्य भी अपने आंसू नहीं रोक सके.

रोड एक्सीडेंट में चली गई जान 

जानकारी के मुताबिक, विनय करीब दो साल पहले योग शिक्षा का प्रशिक्षण लेकर रोजगार के सिलसिले में वियतनाम गए थे. 25 सितंबर की रात हल्की बारिश के दौरान वह अपने दोस्त और रांची निवासी राजा कुमार के साथ स्कूटी से लौट रहे थे. इसी दौरान स्कूटी फिसल गई और सामने से आ रही ओमनी कार से टक्कर हो गई. हादसे में दोनों युवकों की मौत हो गई.विनय का शव शनिवार देर रात जमशेदपुर लाया गया था और रात में TMH में रखा गया. सांसद विद्युत वरण महतो, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पहल के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो सकी.

रांची पहुंचा राजा का शव

वहीं, रांची के कैलाश नगर निवासी राजा कुमार वर्मा का शव भी रविवार को उनके घर पहुंचा. जिला प्रशासन की टीम के साथ ADM मौके पर पहुंचे और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया. राजा को अंतिम बार देखने के लिए घर पर लोगों की भीड़ जुट गई.

राज्यसभा सांसद महुआ माजी भी राजा के घर पहुंचीं 

राजा विदेश में योग शिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे और भारतीय योग को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे. दोनों युवकों के परिवारों ने उनके बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्हें विदेश भेजा था, लेकिन एक सड़क हादसे ने परिवारों की सारी उम्मीदें छीन लीं.अब जमशेदपुर और रांची में दोनों परिवार अपने बेटों को अंतिम विदाई देने की तैयारी में हैं. घर लौटे दोनों बेटों के लिए परिवार की आंखों में आंसू हैं और दिल में ऐसी कमी, जिसे शायद कभी भरा नहीं जा सकेगा.