Jharkhand

क्यों खास है दलमा? 193 वर्गकिमी के इस जंगल में छिपे हैं कई आकर्षण

Rohit Kumar Sr. Correspondent
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क्यों खास है दलमा? 193 वर्गकिमी के इस जंगल में छिपे हैं कई आकर्षण

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिला में स्थित दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी कई  मायने में खास है. प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की मौजूदगी और पर्यटकों के लिए कई सुविधाओं के कारण यह झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल में शामिल है. 193 वर्गकिमी में फैले इस जंगल में कई दुर्लभ ओषधीय पौधे पाए गए है, जो कई बीमारियों में लाभदायक है. पहाड़ी के टॉप पर स्थित शिव मंदिर भी पर्यटकों को यहां आने पर मजबूर करता है. शिव मंदिर के अलावा पहाड़ के टॉप पर दलमा माई मंदिर भी है जो आदिवासियों के लिए काफी खास है. एक हनुमान मंदिर भी यहां मौजूद है. विभिन्न सुविधाओं और आकर्षण के कारण दलमा में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इससे सरकार को अच्छा राजस्व भी मिल रहा है. राज्य का एकमात्र हैंगिंग ब्रिज भी दलमा में बनाया गया है. वन विभाग दलमा में पर्यटकों के लिए और भी कई सुविधाएं विकसित कर रहा है. जिससे पर्यटकों की संख्या यहां और बढ़ने की संभावना है.

राज्य का पहला हैंगिंग रेस्ट भी यहां बना रहा 
यहां पर्यटन को नया आयाम देने के लिए वन विभाग आधुनिक रेस्ट हाउस का निर्माण करवा रहा है. इनका निर्माण लगभग पूरा होने को है. मकुलाकोचा और पिंडराबेड़ा में 15-15 कमरों का रेस्ट हाउस का निर्माण चल रहा है. पिंडराबेड़ा में हैंगिंग रेस्ट हाउस बनाया जा रहा है. जो राज्य का पहले हैंगिंग रेस्ट हाउस होगा. इसके अलावा दलमा में जंगल सफारी भी मौजूद है. 9 सफारी वाहनों से पर्यटक दलमा का सैर करते है. मड हाउस, हिरन पार्क, तितली पार्क, 3डी म्यूजियम की सुविधा भी यहां मौजूद है. पर्यटकों के लिए यहां 6 ट्री हाउस भी बनाए गए हैं. इसपर चढ़ पर्यटक प्रकृति का आनंद लेते है. पहाड़ के टॉप पर बना वॉच टावर भी बनाया गया है.

एक करोड़ पहुंचा राजस्व
ऐसा पहली बार हुआ है जब दलमा से एक करोड़ रूपये का राजस्व सरकार को मिला है. पिछले साल दलमा में 44,500 से अधिक पर्यटक पहुंचे थे. विभाग को करीब एक करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. अब यहां सुविधाएं और बढ़ने से यहां का राजस्व और बढ़ सकता है. दलमा के घने जंगल स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रहा है. जंगल में मिलने वाले मधु बेच लोग अच्छी आमदनी कर रहे है. जंगल में मिलने वाला बांस, महुआ, केंदु आदि भी बेच लोग आमदनी कर रहे हैं. यहां महुआ से अचार भी बनाया जा रहा है. स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए दलमा के मुख्य गेट पर दलमा बुरु हाट भी खोला गया है.

कई दुर्लभ पक्षी और तितलियां मौजूद
दलमा के घने जंगलों में कई दुर्लभ तितली और पक्षी पाए गए है. ब्लैक नेक्ड मोनार्क, इंडियन पिट्टा, जर्डन्स नाइटजार, फेरूजिनस डक समेत 250 से अधिक पक्षियों को यहां देखा गया है. इसके अलावा 200 से अधिक प्रजाति की तितलियां भी यहां देखी गई है. वाटर स्नो फ्लैट, गोल्डन एंजल, गाउडी बेरोन जैसे कई दुर्लभ तितली यहां देखे गए है. हाल ही में यहां पक्षी और तितली महोत्सव का आयोजन हुआ था, जिसमें दुर्लभ तितली और पक्षी देखे गए थे.

जानिए कितना पुराना है दलमा
दलमा का इतिहास काफी पुराना है. 1975 में दलमा अभयारण्य की स्थापना हुई थी. स्वर्गीय संजय गांधी ने इसका उद्घाटन किया था. यह मुख्य रूप से हाथियों के लिए प्रसिद्ध है. इसे इको सेंसेटिव जोन के रूप में घोषित किया गया है. यहां कभी शेर और बाघ जैसे जानवर भी पाए जाते थे.