जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले में नक्सली गतिविधि फिलहाल रुक गई है. कई दिनों से नक्सलियों के इलाके में घूमने की सूचना नहीं है. ना ही किसी कारोबारियों से लेवी मांगने का कोई मामला सामने आया है. इससे कारोबारियों ने राहत की सांस ली है. पुलिस और सुरक्षाबलों की सख्ती से नक्सली दुबके हुए है. सूचना है कि नक्सलियों पश्चिम बंगाल के सीमा में छिपे हुए है. जानकारी हो कि जिले के पटमदा, बोड़ाम और गालूडीह क्षेत्र में नक्सलियों के घूमने की बात सामने आई थी. नक्सलियों द्वारा पटमदा और गालूडीह के पेट्रोल पंप कारोबारियों से लेवी मांगी थी. लेकिन अब पुलिस और सुरक्षाबलों की सतर्कता के कारण नक्सली दुबक गए हैं. पुलिस ने जंगलों में सर्च अभियान तेज कर दिया है. इसके कारण नक्सलियों को वापस भागना पड़ा है. नक्सलियों के दलमा के जंगलों में भी घूमने की सूचना थी.
बिरेन अपने दस्ते के साथ था सक्रिय
5 लाख का इनामी नक्सले बिरेन सिंह उर्फ सागर अपने दस्ते के साथ जिले में वापस पहुंचा था. सागर के साथ उसकी पत्नी मीणा, मदन महतो समेत अन्य नक्सली शामिल थे. बिरेन रवि सरदार के नाम पर पेट्रोल पंप मालिकों से लेवी मांग रहा था. राहगीरों का मोबाइल छीन उसके द्वारा लेवी मांगी गई थी. कई जगहों पर पर्चा फेंक कर भी लेवी मांगने की बात सामने आई थी. लेकिन पिछले करीब एक सप्ताह से लेवी मांगने का कोई मामला सामने नहीं आया है. सारंडा में सुरक्षाबलों के दवाब के कारण नक्सली इधर-उधर भाग रहे है. इसी क्रम में बीरेन अपने दस्ते के साथ पूर्वी सिंहभूम जिले में वापस पहुंचा था.
कई गुटों में बंटे नक्सली
सारंडा में बढ़ते दवाब के कारण नक्सली कई गुटों में बंट गए हैं. बिरेन सिंह ने अपना एक अलग दस्ता बनाया है. इसमें करीब 10 नक्सली शामिल है. जबकि 25 लाख का इनामी नक्सली सचिन में अपने गृह जिला (पूर्वी सिंहभूम) वापस पहुंचा था. लेकिन अब वह अपनी पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल में छिपा है. वहीं एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल के भी पश्चिम बंगाल भागने की सूचना है. जबकि एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा भी सारंडा के जंगलों को छोड़ कोल्हान के जंगल में शरण लिए हुए है. वह भी अपने गृह जिला (गिरिडीह) भागने की फिराक में है लेकिन सुरक्षाबलों के कारण वह जंगल से निकल नहीं पा रहा है.
