जमशेदपुर: नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी जमशेदपुर में नए शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों के स्वागत के लिए भव्य इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में करीब पांच हजार विद्यार्थी, उनके अभिभावक, शिक्षक और विश्वविद्यालय के पदाधिकारी शामिल हुए. समारोह के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, मूल्यों और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराया गया.
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के परिसर में आगमन के साथ हुई. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अतिथियों का स्वागत झारखंड की पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुति के साथ किया गया. इसके बाद सभागार में अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया. राष्ट्रगान के पश्चात दीप प्रज्वलित कर समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया गया. विद्यार्थियों ने गणेश वंदना और विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समारोह को जीवंत बना दिया.
समारोह में शिक्षा, प्रशासन, मीडिया और कॉरपोरेट जगत से जुड़े कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे. इनमें विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, मुख्य अतिथि इंद्रजीत महथा, डीआईजी, एसटीएफ, कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रभात कुमार पाणि, रजिस्ट्रार नागेंद्र कुमार, दैनिक जागरण के संपादक प्रदीप कुमार सिंह, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के ईसी सदस्य धर्मेंद्र सिंह, जमुना ऑटो लिमिटेड के एचआर हेड पंकज गुप्ता, एचआर एग्जीक्यूटिव गदाधर दास, दैनिक जागरण के जनरल मैनेजर दिलावर साहू तथा सितवन्तो देवी महिला कल्याण संस्थान के चेयरमैन मृत्युंजय झा सहित अन्य अतिथि शामिल हुए.
तकनीक और सही निर्णय क्षमता भविष्य की कुंजी: इंद्रजीत महथा
मुख्य अतिथि डीआईजी एसटीएफ इंद्रजीत महथा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का है. ऐसे में युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनकर बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन संभावनाओं के साथ चुनौतियों से भी भरा होता है. इसलिए युवाओं को सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए और समाज के लिए एक मिसाल कायम करने का प्रयास करना चाहिए.
डिग्री के साथ ज्ञान, कौशल और संस्कार जरूरी: मदन मोहन सिंह
कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना या डिग्री प्रदान करना नहीं है. विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, संस्कार और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों से समृद्ध करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शैक्षणिक जीवन का सदुपयोग करते हुए बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया.
अनुशासन और रचनात्मकता को बनाएं सफलता का आधार
कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रभात कुमार पाणि ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध और नवाचार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला. उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, निरंतर अध्ययन और व्यावहारिक कौशल को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि बदलते समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपने विषय के साथ-साथ व्यावहारिक और रोजगारपरक दक्षताओं पर भी ध्यान देना होगा.
मीडिया समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम: प्रदीप कुमार सिंह
दैनिक जागरण के संपादक प्रदीप कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रेस और मीडिया केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने और जन-जागरूकता फैलाने का सशक्त स्तंभ है. उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा और सीखने की ललक बनाए रखने की अपील की.
उन्होंने कहा कि सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता. विद्यार्थियों को अपने विचारों में स्पष्टता, बातों में सत्यता और कर्मों में निष्ठा बनाए रखनी चाहिए. यही गुण उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि आज के दौर में सूचनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही और सकारात्मक ज्ञान का चयन करना ही वास्तविक समझदारी है. विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए भी करना चाहिए.
विद्यार्थियों को दिलाई गई अनुशासन की शपथ
समारोह के दौरान रजिस्ट्रार नागेंद्र कुमार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के मूल्यों, अनुशासन, नियमों और शैक्षणिक उत्तरदायित्वों के प्रति निष्ठावान रहने की शपथ दिलाई. नए शैक्षणिक सफर की शुरुआत के प्रतीक के रूप में विद्यार्थियों के बीच इंडक्शन बैग और किट का वितरण भी किया गया.
कार्यक्रम में कॉरपोरेट और मीडिया जगत से आए अन्य अतिथियों ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने आधुनिक संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास और रोजगारपरक दक्षताओं को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए.
समारोह के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आमंत्रित अतिथियों को विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का समापन मृत्युंजय झा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया.
