टीएनपी डेस्क: दीवाली और छठ के दौरान बिहार और झारखंड आने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इन त्योहारों पर दूसरे राज्यों में रहने वाले अधिकतर लोग अपने घर लौटते हैं. इसके लिए लोग कई महीने पहले से ही ट्रेनों में टिकटों की बुकिंग शुरू कर देते हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता है. वहीं फ्लाइट का किराया इतना ज्यादा होता है कि हर कोई इसे अफोर्ड नहीं कर पाता. ऐसे में घर पहुंचने के लिए यात्रियों की पहली पसंद ट्रेन ही होती है.
यही वजह है कि त्योहारों के दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है. लोग अपनी जान जोखिम में डालकर भेड़-बकरियों की तरह लटककर सफर करने को मजबूर होते हैं. स्थिति ऐसी हो जाती है कि ट्रेन के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं बचती. सीट मिलना तो दूर, यात्रियों को खड़े होकर सफर करने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है. कई ट्रेनों में भीड़ का आलम इस कदर होता है कि लोग जनरल और स्लीपर कोच में ठसाठस भरकर अपने घर पहुंचने को मजबूर होते हैं.
दरअसल, बिहार और झारखंड आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से सामान्य और स्लीपर कोचों में काफी भीड़ हो जाती है. लंबी दूरी की ट्रेनों में पहले से ही सीटें फुल हैं. ऐसे में जिन यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है वे किसी तरह ट्रेन में सवार होकर अपने गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
ट्रेन के गेट पर भी यात्रियों की भीड़
कई ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ सिर्फ कोच के अंदर ही नहीं, बल्कि दरवाजों और गेट के आसपास भी देखी जा रही है. यात्रियों को सामान के साथ खड़े होकर घंटों सफर करना पड़ रहा है. इस स्थिति में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
रेलवे की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
ट्रेनों में बढ़ती भीड़ के बीच रेलवे की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं. यात्रियों का कहना है कि जब ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है तो अतिरिक्त कोच और स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर मिल सके. बिहार और झारखंड आने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन का सफर किसी चुनौती से कम नहीं होता है. घर पहुंचने की जल्दबाजी में लोग जोखिम उठाकर यात्रा करने को मजबूर होते हैं. ऐसे में रेलवे के सामने यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है.
