Jharkhand

झारखंड में दिव्यांगों को हर महीने मिलती है ₹1,000 पेंशन, जानें कौन ले सकता है योजना का लाभ

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड सरकार की ओर से राज्य के जरूरतमंद और दिव्यांग नागरिकों के लिए कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चलाई जाती हैं. इन्हीं में से एक है  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना. इस योजना का उद्देश्य गंभीर रूप से दिव्यांग और बहु-विकलांग व्यक्तियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किसी पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें. योजना को झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा लागू किया जाता है. इसके तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने ₹1,000 की पेंशन दी जाती है. इसमें केंद्र सरकार की ओर से ₹300 और राज्य सरकार की ओर से ₹700 का योगदान शामिल है.

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए. साथ ही उसका नाम गरीबी रेखा से नीचे यानी BPL परिवारों की सूची में शामिल होना जरूरी है. आवेदक गंभीर या एकाधिक दिव्यांगता से पीड़ित होना चाहिए और इसके लिए मान्य दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. योजना का लाभ उन्हीं पात्र लोगों को मिलेगा, जो किसी अन्य केंद्र या राज्य सरकार की पेंशन योजना से पेंशन प्राप्त नहीं कर रहे हैं. हालांकि, संबंधित सरकारी नियमों और निर्धारित अपवादों के अनुसार पात्रता का अंतिम निर्णय सक्षम विभागीय स्तर पर किया जाता है.

किन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ?

योजना के लिए पात्रता तय करते समय परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी देखा जाता है. उपलब्ध दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे परिवार, जिनके पास मोटर चालित दोपहिया, तिपहिया या चार पहिया वाहन अथवा मछली पकड़ने वाली नाव है, उन्हें अपात्र माना जा सकता है. इसी तरह किसान क्रेडिट कार्ड की ₹50 हजार या उससे अधिक की मानक सीमा वाले परिवार, सरकारी कर्मचारी के परिवार और सरकार के साथ पंजीकृत गैर-कृषि उद्योगों से जुड़े परिवार भी निर्धारित मानदंडों के तहत अपात्र हो सकते हैं.

इसके अलावा जिस परिवार के किसी सदस्य की मासिक आय ₹10,000 या उससे अधिक है, आयकर या सेवा कर का भुगतान किया जाता है, अथवा परिवार के पास निर्धारित सीमा से अधिक सिंचित भूमि है, वे भी योजना के लाभ से बाहर हो सकते हैं. तीन या उससे अधिक कमरों वाले ऐसे पक्के मकान, जिनकी दीवारें और छत कंक्रीट की हों, रेफ्रिजरेटर या लैंडलाइन फोन वाले परिवारों पर भी निर्धारित अपात्रता मानदंड लागू हो सकते हैं. हालांकि, कुछ मामलों में सरकारी आवास योजना के लाभार्थियों के लिए अलग प्रावधान दिए गए हैं.

कैसे करें आवेदन?

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन है. आवेदन करने के लिए सबसे पहले निर्धारित आवेदन पत्र को सही तरीके से भरना होगा. आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जरूरी जानकारियां दर्ज करने के बाद आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करनी होंगी. जहां जरूरी हो, दस्तावेजों का स्व-सत्यापन भी किया जा सकता है.

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले आवेदक अपना भरा हुआ और हस्ताक्षरित आवेदन पत्र संबंधित खंड विकास अधिकारी (BDO) के कार्यालय में जमा कर सकते हैं. वहीं, शहरी क्षेत्र के आवेदकों को संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी के कार्यालय में आवेदन और दस्तावेज जमा करने होंगे. आवेदन जमा करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि फॉर्म में कोई अनिवार्य जानकारी छूटी न हो.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

योजना के तहत आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज साथ रखना आवश्यक है. इनमें आधार कार्ड या आधार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में स्व-घोषणा, मतदाता पहचान पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, बैंक खाता पासबुक और घोषणा पत्र शामिल हैं. बैंक खाते की जानकारी सही देना जरूरी है, क्योंकि पेंशन की राशि लाभार्थी के खाते में भेजे जाने की प्रक्रिया के लिए इसका उपयोग किया जाता है.

योजना का उद्देश्य क्या है?

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों को नियमित आर्थिक सहायता देना है. मासिक पेंशन की राशि भले ही सीमित हो, लेकिन यह लाभार्थियों को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है. अगर आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति योजना के निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है, तो जरूरी दस्तावेजों के साथ संबंधित कार्यालय में आवेदन किया जा सकता है. आवेदन से पहले पात्रता और दस्तावेजों से जुड़े नवीनतम नियम संबंधित विभाग से जरूर सत्यापित कर लें.