TNP DESK: झारखंड में खेती-किसानी करने वाले परिवारों के लिए बारिश का मौसम राहत के साथ कई बार बड़ा खतरा भी लेकर आता है. खेत में धान की रोपाई, निराई या दूसरे कृषि कार्य के दौरान किसान अक्सर खुले आसमान के नीचे रहते हैं. ऐसे में अचानक वज्रपात यानी आकाशीय बिजली गिरने से कई बार किसान अपनी जान गंवा देते हैं. परिवार के लिए यह सिर्फ एक सदस्य को खोने का दुख नहीं होता, बल्कि घर की आय और खेती की जिम्मेदारी पर भी बड़ा असर पड़ता है. ऐसे मुश्किल वक्त में झारखंड सरकार की ओर से वज्रपात से मौत होने पर 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने का प्रावधान है.
खेत में काम करते समय किसान की मौत तो परिवार को मिल सकती है सहायता
अगर कोई किसान खेत में काम कर रहा है और उसी दौरान वज्रपात की चपेट में आने से उसकी मौत हो जाती है, तो उसका परिवार निर्धारित सरकारी नियमों के तहत अनुग्रह सहायता का पात्र हो सकता है. यह राशि किसान के परिवार को अचानक आई आर्थिक परेशानी से उबरने में मदद देने के उद्देश्य से दी जाती है.यहां यह समझना जरूरी है कि 4 लाख रुपये किसान के लिए अलग से चलने वाली कोई बीमा योजना नहीं है. यह प्राकृतिक आपदा के कारण हुई मृत्यु के मामले में मिलने वाली सरकारी अनुग्रह सहायता है. इसलिए किसान की मौत का कारण वज्रपात होना सरकारी जांच और रिकॉर्ड से प्रमाणित होना जरूरी है.
4 लाख रुपये किसे मिलते हैं?
वज्रपात से किसान की मौत होने के बाद सहायता राशि मृतक के वैध आश्रित या कानूनी उत्तराधिकारी को दिए जाने का प्रावधान है. यानी परिवार में पत्नी, बच्चे या अन्य पात्र आश्रित होने की स्थिति में नियमों के अनुसार भुगतान किया जाता है.इसलिए किसान की मौत के बाद परिवार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन तक पहुंचे और मृतक से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध हों. सरकारी रिकॉर्ड में वज्रपात से मौत के स्पष्ट साक्ष्य के आधार पर वैध लाभुक को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान दर्ज है.
किसान के परिवार को क्या करना होगा?
किसान की वज्रपात से मौत होने के बाद परिवार को सबसे पहले स्थानीय प्रशासन, अंचल कार्यालय या संबंधित अधिकारी को घटना की जानकारी देनी चाहिए. इसके बाद घटना का सत्यापन कराया जाता है. मौत का कारण वज्रपात होने की पुष्टि होने पर अनुग्रह सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.परिवार के पास आम तौर पर मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान संबंधी दस्तावेज, बैंक खाते की जानकारी और मृतक से संबंध/आश्रित होने का प्रमाण जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. हालांकि किसी मामले में आवश्यक दस्तावेज स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकते हैं.
वज्रपात से मौत का प्रमाण क्यों जरूरी है?
किसान परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल बारिश के दौरान मौत हो जाना पर्याप्त नहीं है. सरकारी सहायता के लिए यह प्रमाणित होना जरूरी है कि मौत वज्रपात के कारण हुई है. इसलिए घटना के बाद प्रशासन को सूचना देना और जांच की प्रक्रिया पूरी कराना बेहद जरूरी है.अगर किसान खेत में काम करते समय वज्रपात की चपेट में आता है, तो परिवार को घटना को सामान्य दुर्घटना मानकर छोड़ना नहीं चाहिए. स्थानीय प्रशासन को तत्काल सूचना देने से सरकारी रिकॉर्ड में घटना दर्ज होती है और सहायता राशि की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
खेती पर निर्भर परिवार के लिए क्यों अहम है यह राशि?
किसान की अचानक मौत होने पर परिवार के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो जाती हैं. खेती की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और कर्ज जैसी जिम्मेदारियां परिवार पर आ सकती हैं. ऐसे में 4 लाख रुपये की सरकारी अनुग्रह सहायता परिवार के लिए तत्काल आर्थिक सहारा बन सकती है.खासकर छोटे और सीमांत किसानों के परिवारों के लिए कमाने वाले सदस्य की मौत का असर सीधे घरेलू आय पर पड़ता है. इसलिए वज्रपात से किसान की मौत के मामलों में परिवार को मिलने वाली सरकारी सहायता की जानकारी होना बेहद जरूरी है.
किसान परिवार रखें ये बातें याद
अगर खेत में काम करते समय वज्रपात से किसान की मौत होती है, तो परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता मिल सकती है. इसके लिए मौत का कारण वज्रपात होना सरकारी तौर पर प्रमाणित होना जरूरी है. घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दें, जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें और मृतक के वैध आश्रित/उत्तराधिकारी के रूप में सहायता राशि के लिए प्रक्रिया पूरी करें.
बरसात के मौसम में किसानों को खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए. मौसम खराब होने पर खुले खेत में काम करने से बचें और गरज-चमक शुरू होने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं. कुछ मिनट की सावधानी किसी परिवार को जिंदगी भर के दर्द से बचा सकती है.
