हजारीबाग (HAZARIBAGH): जहां एक ओर झारखंड में SIR को लेकर चर्चाएँ तेज हैं, हर जगह यह अपील की जा रही है की SIR प्रक्रिया में हिस्सा लें, वहीं दूसरी ओर BLO और सुपरवाइजरों की लापरवाही पर DC सख़्त हैं. मामला जुड़ा है हज़ारीबाग़ से जहाँ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके वेतन पर रोक लगा दी है.
दरअसल जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त हेमंत सती ने समीक्षा बैठक के दौरान कार्य में ढिलाई पाए जाने पर संबंधित बीएलओ (BLO) सुपरवाइजरों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय महत्व के इस अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी.
समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मांडू विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी महेंद्र छोटन उरांव, हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ आदित्य पांडेय तथा उप निर्वाचन पदाधिकारी वेदवंती कुमारी मौजूद रहे. बैठक के दौरान उपायुक्त ने गणना प्रपत्रों के वितरण, संग्रहण, डिजिटाइजेशन और एएसडीडी (ASDD) सूची के अद्यतन कार्य की विस्तार से समीक्षा की.
समीक्षा के दौरान कई क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने और कुछ बीएलओ सुपरवाइजरों की अनुपस्थिति पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी स्तर की शिथिलता पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी.
उपायुक्त ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई 2026 तक चलेगा. इस दौरान बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाताओं के गणना प्रपत्र वितरित करने और उन्हें वापस संग्रहित करने का कार्य करना है. उन्होंने सभी बीएलओ और सुपरवाइजरों को निर्देश दिया कि वे फिलहाल अन्य सभी विभागीय और गैर-विभागीय कार्यों को स्थगित कर इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें. साथ ही 9 जुलाई तक हर हाल में शत-प्रतिशत गणना प्रपत्रों का वितरण सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम भी दिया.
बैठक के अंत में उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि त्रुटिरहित और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है. इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी गंभीरता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा. उन्होंने निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी लक्ष्य पूरे किए जाएं. यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ आगे भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. उपायुक्त की इस कार्रवाई के बाद निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है.
