हजारीबाग (Hazaribagh): हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित पगार बिरहोर टोला में एक परिवार बेहद ही जोखिम भरा जीवन व्यतीत कर रहे है. यह परिवार आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय से आते है और फिलहाल ये परिवार एनटीपीसी की चट्टी बरियातू कोयला खनन परियोजना से महज करीब 50 मीटर की दूरी पर सरकारी आवासों में रह रहे हैं. खनन और ब्लास्टिंग की गतिविधियों के बीच जीवन गुजार रहे इन परिवारों की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई गई है.
इस मामले से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता मंटू सोनू ने आयोग को भेजी शिकायत में पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने हजारीबाग उपायुक्त समेत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और विभागों की भूमिका की भी जांच कराने का अनुरोध किया है.
धूल, प्रदूषण और स्वास्थ्य है बड़ी एमएमचिंता
सामाजिक कार्यकर्ता मंटू सोनू के दिए शिकायत के अनुसार, खदान में ब्लास्टिंग होते ही भारी मात्रा में धूल उड़ती है और पूरा टोला धूल के अम्बार में ढक जाता है. आपको बात दें कि इस परियोजना का कार्य 25 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ और इस परियोजना को चट्टी बरियातू परियोजना के नाम से जाना जाता है जो कि अब भी खनन गतिविधियों में शामिल है. लंबे समय से बस्ती खनन क्षेत्र के अत्यंत निकट होने के कारण धूल और प्रदूषण का असर लगातार बना हुआ है. जिला प्रशासन की संयुक्त जांच रिपोर्ट में भी इस स्थिति का उल्लेख किए जाने का दावा किया गया है.
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के हवाले से शिकायतकर्ता ने बताया कि बिरहोर परिवारों में आंखों का संक्रमण, श्वास संबंधी संक्रमण, त्वचा रोग, गंभीर एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याएं सामने आई हैं.इन बीमारियों और खनन गतिविधियों के बीच संभावित संबंध की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग कि गई है.
आठ मौतों ने उठाए गंभीर सवाल
खनन शुरू होने के बाद बिरहोर समुदाय के आठ सदस्यों की मौत का जिक्र शिकायत में किया गया है. इनमें बिराज बिरहोर (70 वर्ष), किरण कुमारी उर्फ किरणी बिरहोर (12 वर्ष), आकेश बिरहोर (10 वर्ष), दुर्गा बिरहोर (46 वर्ष), गीता देवी (39 वर्ष), ननकी देवी (57 वर्ष), रूपा कुमारी (15 दिन) और करीब दो माह के एक नवजात शामिल हैं.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन मामलों में मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया, जिससे मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण स्पष्ट नहीं हो सके.एन एच आर सी से जूड़े सभी मामलों की स्वतंत्र मेडिकल-लीगल और फोरेंसिक समीक्षा कराने की मांग की गई है.
पुनर्वास अब भी अधूरा, भारी खनन जारी
जिला प्रशासन की संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया था कि जब तक बिरहोर समुदाय का सुरक्षित और उपयुक्त पुनर्वास सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र में खनन कार्य उचित नहीं है.शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस अनुशंसा के बावजूद खनन गतिविधियां जारी रहीं.सवाल उठाया गया है कि प्रशासनिक समिति की सिफारिश पर उपायुक्त और संबंधित विभागों ने क्या कार्रवाई की.
प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मकान बनाए गए हैं, लेकिन परिवार वहां जाने को तैयार नहीं हैं. शिकायतकर्ता का कहना है कि बिरहोरों की आजीविका जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी है, इसलिए केवल मकान उपलब्ध करा देना पूर्ण पुनर्वास नहीं माना जा सकता.
एन एच आर सी से की गई मांगें
शिकायत में NHRC से स्वतंत्र बहु-विषयक जांच समिति गठित करने, PM10 व PM2.5 की जांच कराने तथा ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन और धूल के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की गई है. साथ ही जांच और सुरक्षित पुनर्वास पूरा होने तक टोला के आसपास खनन व ब्लास्टिंग गतिविधियों को सीमित या अंतरिम रूप से स्थगित करने का आग्रह किया गया है.