गुमला (GUMLA): एक तरफ सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई और जरूरी सुविधाएं देने की बात होती है, दूसरी तरफ गुमला जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर एक स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है. उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तुकुटोली में पहली से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए न पर्याप्त कमरे हैं और न ही शिक्षक. स्कूल में पानी का इंतजाम भी नहीं है. इसका असर पढ़ाई से लेकर मिड-डे मील और शौचालय तक पर पड़ रहा है.
स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए सिर्फ दो कमरे हैं. बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी दो पारा शिक्षकों सुकरू कुजूर और हेमरिटा बेकमान पर है. शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे स्कूल को बेहतर तरीके से चलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं.
दो शिक्षकों पर पांच कक्षाओं की जिम्मेदारी
पांच कक्षाओं के बच्चों को दो शिक्षकों के सहारे पढ़ाना आसान नहीं है. शिक्षकों को पढ़ाई के साथ विभागीय काम भी देखने पड़ते हैं. रिपोर्ट जमा करने या दूसरे सरकारी काम से किसी एक शिक्षक को स्कूल से बाहर जाना पड़े तो दूसरे शिक्षक पर पूरी जिम्मेदारी आ जाती है.
स्कूल भवन की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है. सिर्फ दो कमरों में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.
चापाकल खराब, मिड-डे मील के लिए भी पानी की परेशानी
स्कूल की सबसे बड़ी समस्याओं में पानी शामिल है. परिसर का चापाकल लंबे समय से खराब बताया जा रहा है. मिड-डे मील बनाने वाली मनीषा कुमारी के मुताबिक, खाना बनाने के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है. इसी पानी का इस्तेमाल बच्चों के पीने के लिए भी किया जाता है.
पानी नहीं होने का असर स्कूल के शौचालय पर भी पड़ रहा है. दावा है कि शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं होने के कारण बच्चों को बाहर जाना पड़ता है.
स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि करीब चार महीने से मिड-डे मील चलाने के लिए मिलने वाली राशि नहीं मिली है. इसके बावजूद बच्चों का खाना बंद न हो, इसके लिए शिक्षक अपने स्तर पर पैसे और उधार के सहारे व्यवस्था कर रहे हैं.
जिला मुख्यालय के पास यह हाल तो दूर के स्कूलों का क्या?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित सरकारी स्कूल में पानी, शिक्षक और कमरों जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हैं तो दूर-दराज के स्कूलों की स्थिति कैसी होगी.
तुकुटोली स्कूल की तस्वीर बताती है कि सिर्फ बच्चों का नामांकन कराना काफी नहीं है. अच्छी पढ़ाई के लिए शिक्षक, कमरे, पीने का पानी, चालू शौचालय और समय पर मिड-डे मील की राशि भी उतनी ही जरूरी है. अब जरूरत है कि शिक्षा विभाग इन समस्याओं की जांच कर स्कूल में जरूरी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराए.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह