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Jharkhand

राज्य में खिलाड़ियों की चिंता नहीं कर रही है सरकार, बदहाली की स्थिति में जीवन जीने को मजबूर है खिलाड़ियों के परिवार

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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गुमला (GUMLA): देश के लिए मैदान पर उतरकर गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों की तस्वीर जब सम्मान समारोह के मंच पर दिखाई देती है, तो हर किसी को गर्व होता है. लेकिन क्या कभी उस खिलाड़ी के घर और परिवार की हालत पर भी नजर जाती है? झारखंड के गुमला से सामने आई एक तस्वीर इसी सवाल को खड़ा करती है. हॉकी में देश का नाम रोशन करने वाली गोल्ड मेडलिस्ट पार्वती तोपनो का परिवार आज भी बेहद मुश्किल हालात में जीवन गुजार रहा है. लगातार बारिश के कारण कामडारा के कुम्हार टोली स्थित उनके घर की एक दीवार ढह गई. परिवार ने किसी तरह लकड़ी के सहारे दीवार को टिकाकर रखा है. ऐसे में घर के और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है और परिवार को अब प्रशासन से मदद की उम्मीद है.

पार्वती तोपनो के पिता सोमा तोपनो मजदूरी और राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. तीन बच्चों में सबसे छोटी पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया. प्रतिभा को देखते हुए उसका चयन रांची के एकलव्य आवासीय हॉस्टल के लिए हुआ, जहां उसने हॉकी का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद पार्वती ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. 4 से 13 सितंबर 2026 तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में वह गुमला जिले से भारतीय टीम में शामिल होने वाली इकलौती हॉकी खिलाड़ी बनीं और टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर देश, राज्य और जिले का नाम रोशन किया. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद पिता ने मजदूरी कर बेटी के खेल से जुड़े जरूरी सामान जुटाए और उसका हौसला बनाए रखा.

अब सवाल यह है कि जिस बेटी की उपलब्धि पर पूरा जिला गर्व करता है, उसके परिवार को सुरक्षित घर के लिए आखिर कब मदद मिलेगी? परिवार और ग्रामीणों ने प्रखंड व जिला प्रशासन से सहायता की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को फूल-माला पहनाकर सम्मानित करना जरूरी है, लेकिन उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. ग्रामीणों के मुताबिक, सरकार की आवास समेत कई योजनाओं का लाभ इस परिवार को मिल सकता है, लेकिन अब तक उन्हें ठोस मदद नहीं मिली है. पार्वती की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि और उसके परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उन प्रतिभाओं की चुनौती भी सामने रखती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद देश के लिए पदक जीत रही हैं. अब परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द राहत और सुरक्षित आवास की व्यवस्था करेगा.

रिपोर्ट- सुशील कुमार सिंह