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Jharkhand

ओबीसी बंद का गुमला में व्यापक असर, सड़क से बाजार तक सन्नाटा

Mausam Muskan
Mausam Muskan
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

गुमला(Gumla ): झारखंड के गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी और रांची में ओबीसी आरक्षण समाप्त किए जाने और देश में होने वाली जनगणना से ओबीसी कॉलम हटाए जाने के विरोध में ओबीसी मोर्चा द्वारा पांच जिलों में बुलाई गई बंदी का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. गुमला जिले में सुबह से ही वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप है और अधिकांश दुकानें भी बंद हैं.

जिले से गुजरने वाले दोनों प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग-143 और राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर भी वाहनों का परिचालन बाधित है, जिसके कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. एनएच-143 झारखंड को छत्तीसगढ़ होते हुए महाराष्ट्र से जोड़ता है जबकि एनएच-43 झारखंड को सिमडेगा के रास्ते ओडिशा से जोड़ता है. ऐसे में दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों का काफी महत्वपूर्ण स्थान है.

बंदी के दौरान कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी हुई है. वहीं बंद समर्थक सुबह से ही समूह बनाकर विभिन्न इलाकों में घूमते नजर आए और बंद को सफल बनाने की अपील करते रहे.

ओबीसी मोर्चा के नेता शिवदयाल गोप ने कहा कि यह उनके अस्तित्व और हक-अधिकार की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि मजबूरी में उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा है. उनका कहना है कि इन पांच जिलों में ओबीसी समाज के बच्चों के लिए सरकारी नौकरी के अवसर तक सीमित हो गए हैं जबकि उनकी आबादी काफी अधिक है. उन्होंने कहा कि सरकार भी जनसंख्या के आधार पर लोगों को उनका हक और अधिकार देने की बात करती है. ऐसे में पर्याप्त जनसंख्या होने के बावजूद अधिकार नहीं मिलने पर वे आखिर कहां जाएं. इसी कारण उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है.

वहीं, ओबीसी नेता दिलीप नाथ साहू ने कहा कि संयुक्त बिहार के समय ओबीसी को सम्मानजनक आरक्षण प्राप्त था, लेकिन झारखंड बनने के बाद ओबीसी समाज के सामने परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण होती गई हैं. उन्होंने कहा कि आज ओबीसी समाज का अस्तित्व खतरे में है और उन्हें ऐसा महसूस होता है कि सरकार उन्हें यहां का नागरिक तक नहीं मानती. उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के रूप में किया जाता है.

ओबीसी युवा नेता कौशल साहू ने कहा कि सुबह से जिस तरह लोगों का समर्थन मिल रहा है, उससे स्पष्ट है कि आम लोग भी ओबीसी समाज के दुख-दर्द को समझ रहे हैं. उन्हें भी लगता है कि ओबीसी मोर्चा द्वारा बुलाई गई यह बंदी उनके हक और अधिकार की लड़ाई है.

बंद समर्थकों ने गुमला के टावर चौक, पटेल चौक, डुमरडीह चौक सहित विभिन्न चौक-चौराहों पर जाम कर दिया है. इसके चलते शहर में पूरी तरह बंद जैसी स्थिति बनी हुई है. दवा दुकानों को छोड़कर अधिकांश दुकानें बंद हैं.

गुमला जिले से प्रतिदिन 500 से अधिक बसों का परिचालन होता है, लेकिन बंदी के कारण बसों का परिचालन भी पूरी तरह ठप है. इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि बंद समर्थकों का कहना है कि आम लोगों को हो रही परेशानी के लिए वे क्षमा मांगते हैं लेकिन यह उनके हक, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई है. इसी कारण वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं.

रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह