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Jharkhand

गुमला सदर अस्पताल की बदहाली के खिलाफ देवकी देवी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

गुमला(GUMLA): सदर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, मरीजों को बेड नहीं मिलने और इलाज के बजाय रांची रेफर किए जाने जैसी समस्याओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता देवकी देवी ने अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है. वह अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं. उनके समर्थन में कई महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता भी धरने पर बैठे हैं.

डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान

देवकी देवी का कहना है कि गुमला एक आदिवासी बहुल और गरीब जिला है. यहां के लोगों को अगर सरकारी अस्पताल में ही सही इलाज नहीं मिलेगा, तो गरीब परिवार आखिर कहां जाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल में समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है. खासकर रात में बच्चों के डॉक्टर नहीं रहने से मासूमों के इलाज में दिक्कत आती है. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों की जान तक चली जाती है.

रांची रेफर होने से गरीब परिवारों पर बोझ

देवकी देवी ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल में आने वाले कई मरीजों को इलाज देने के बजाय रांची रेफर कर दिया जाता है. इससे गरीब परिवारों को आर्थिक और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. रांची में इलाज के दौरान मरीज के परिजनों के रहने और देखभाल की भी समस्या होती है. उन्होंने कहा कि अगर गुमला सदर अस्पताल में ही बेहतर इलाज की व्यवस्था हो जाए, तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है.

जांच की सुविधा नहीं, बाहर खर्च करने को मजबूर मरीज

उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी जरूरी जांच की सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर जाकर जांच करानी पड़ती है. इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है. देवकी देवी ने गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए गुमला में ही रिम्स-2 बनाने की मांग की है.

नेल्सन भगत ने भी किया समर्थन

सामाजिक कार्यकर्ता नेल्सन भगत ने देवकी देवी के आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड बने 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन आज भी आदिवासी बहुल इलाके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. उनके मुताबिक, करीब 14 लाख की आबादी वाले गुमला जिले के सदर अस्पताल में 35 डॉक्टर होने चाहिए, जबकि फिलहाल केवल 15 से 16 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं.

नेल्सन भगत ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के दावों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अस्पताल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

रिपोर्ट- सुशील कुमार