गोड्डा: जिला में सरकारी योजनाओं के तहत हो रहे सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने का सिलसिला थम नहीं रहा है. धर्मोडीह पुलिस लाइन सड़क निर्माण में अनियमितता का मामला अभी चर्चा में ही था कि अब कालीपीठ से धर्मोडीह कचरा प्लांट तक बन रही पीसीसी सड़क के निर्माण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. आजादी के बाद पहली बार बन रही करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से नगर परिषद द्वारा टेंडर के माध्यम से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने का आरोप लगा है.
मुखिया ने संभाला मोर्चा, निर्माण स्थल पर पहुंचे
सड़क निर्माण कार्य में कथित गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद पांडुबथान पंचायत के मुखिया संजय सिंह ने मोर्चा संभाल लिया. वह निर्माण स्थल पर पहुंचे और सड़क निर्माण कार्य का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मौके की स्थिति को कैमरे में दर्ज कराया. मुखिया का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है और प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं कराया जा रहा है. उक्त सड़क का निर्माण महगामा निवासी संवेदक शाकिर अंसारी द्वारा कराया जा रहा है. हालांकि निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
शिकायत के बाद निर्माण कार्य बंद
मुखिया संजय सिंह ने मामले की जानकारी संबंधित विभाग को देते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की. शिकायत के बाद फिलहाल सड़क निर्माण कार्य बंद करा दिया गया है. बताया जा रहा है कि विभागीय स्तर पर निर्माण कार्य की जांच कराई जाएगी. जांच में गुणवत्ता और प्राक्कलन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का काम शुरू होगा.
कचरा प्लांट तक पहुंचने के लिए बन रही सड़क
गौरतलब है कि धर्मोडीह पंचायत क्षेत्र में नगर परिषद का कचरा डंप किया जाता है. कचरा प्लांट तक आवागमन की सुविधा बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर परिषद की ओर से टेंडर के माध्यम से पीसीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. ऐसे में करीब 1.40 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वपूर्ण योजना में निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उचित इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल गंभीर हैं.
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सड़क निर्माण में कथित अनियमितता के आरोपों ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं. देखना होगा कि जांच में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है. फिलहाल निर्माण कार्य बंद है और जांच रिपोर्ट के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है.