☰
Jharkhand

बूढ़ा पहाड़ पर CRPF की तैनाती रहे बरकरार, ग्रामीणों ने केंद्र से लगाई गुहार

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
Copy Editor

गढ़वा (GARHWA): कभी गढ़वा का बूढ़ा पहाड़ माओवादियों का गढ़ और कथित हेडक्वार्टर माना जाता था. जिस इलाके में कभी गोलियों की आवाज और बारूदी सुरंगों का खतरा आम था. बूढ़ा पहाड़ ऐसे जगह स्थित है जहां से छत्तीसगढ़, बंगाल जैसे कई राज्यों के रास्ते डायरेक्ट कनेक्ट होते है. लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल अलग है. आज बूढ़ा पहाड़ में सुरक्षा और विकास की नई तस्वीर दिखाई देती है. और यही कारण है की 27 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बूढ़ा पहाड़ पहुंचे थे और इसे दौरा करने वाले झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बने. इसी दौरान बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी. सरकार के मुताबिक, सुरक्षा बलों के अभियान के बाद इस इलाके को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराया गया.

अब इसी को लेकर बूढ़ा पहाड़ से 172 बटालियन सीआरपीएफ को हटाने के आदेश के बाद ग्रामीणों ने केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि इलाके को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराने में सुरक्षा बलों ने लंबा अभियान चलाया और कई जवानों ने अपनी जान गंवाई. ऐसे में क्षेत्र से केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी कम होने को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है.

दरअसल, करीब तीन दशक से गढ़वा में तैनात 172 बटालियन सीआरपीएफ को यहां से हटाकर अरुणाचल प्रदेश भेजे जाने का आदेश दिया गया है. इसके बाद बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने बटालियन की तैनाती गढ़वा में यथावत रखने की मांग उठाई है. ग्रामीणों ने सांसद विष्णु दयाल राम को ज्ञापन सौंपकर मामले में पहल करने की अपील की है.

ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए 172 बटालियन की तैनाती गढ़वा में बरकरार रखी जाए. उन्होंने सांसद विष्णु दयाल राम और स्थानीय विधायक आलोक कुमार चौरसिया से भी केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाने की मांग की है. यह मामला झारखंड के गढ़वा जिले के बूढ़ा पहाड़, बड़गड़ और भंडरिया क्षेत्र से जुड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि सीमावर्ती और भौगोलिक रूप से संवेदनशील इलाके में पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है. फिलहाल ग्रामीणों की मांग केंद्र सरकार के स्तर पर पुनर्विचार की है.

रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कुमार