Jharkhand

गढ़वा के कस्तूरबा विद्यालय में बवाल! महिला गार्डों को हटाने पर वार्डन और जिप सदस्य के बीच जमकर हुआ हंगामा

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
गढ़वा के कस्तूरबा विद्यालय में बवाल! महिला गार्डों को हटाने पर वार्डन और जिप सदस्य के बीच जमकर हुआ हंगामा

गढ़वा (GARHWA): झारखंड के गढ़वा जिले के बरडीहा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय इन दिनों विवादों के केंद्र में है. विद्यालय से तीन महिला होमगार्ड को हटाए जाने के बाद मामला इतना बढ़ गया कि परिसर में घंटों तक हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस का दौर चलता रहा. एक ओर जिला परिषद सदस्य, हटाई गई महिला गार्ड और ग्रामीणों ने वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं वार्डन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश करार दिया. पूरे घटनाक्रम ने विद्यालय की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार, बरडीहा प्रखंड मुख्यालय स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में कार्यरत तीन महिला होमगार्ड, सविता देवी, बबीता देवी और प्रियंका देवी को हाल ही में सेवा से हटा दिया गया. इस कार्रवाई के विरोध में जिला परिषद सदस्य अर्चना प्रकाश, दोनों पूर्व महिला गार्ड, अभिभावक और ग्रामीण विद्यालय पहुंचे. इस दौरान विद्यालय परिसर में काफी देर तक बहस और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना रहा. जिला परिषद सदस्य अर्चना प्रकाश ने आरोप लगाया कि महिला गार्डों को बिना किसी स्पष्ट कारण के नौकरी से हटाया गया है. उनका कहना था कि विद्यालय परिसर में कुछ बाहरी लोगों का दिन-रात आना-जाना होता था, जिसका महिला गार्डों ने विरोध किया था. इसी वजह से उन्हें सेवा से हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह मनमानी है और विद्यालय का संचालन नियमों के बजाय व्यक्तिगत निर्णयों के आधार पर किया जा रहा है.

हटाई गई महिला गार्ड सविता देवी और बबीता देवी ने दावा किया कि वे वर्ष 2025 से विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रही थीं, लेकिन बिना किसी नोटिस और कारण बताए उन्हें हटा दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में कुछ बाहरी लोगों का नियमित रूप से आना-जाना होता था. जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. दोनों महिला गार्डों ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत उपायुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर की है. उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने और दोबारा सेवा में बहाल किए जाने की मांग की. उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और बिना वजह नौकरी छिन जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

जिला परिषद सदस्य अर्चना प्रकाश ने भी कहा कि इससे पहले भी कुछ जनप्रतिनिधियों ने विद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाई थी, लेकिन उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई. उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. दूसरी ओर विद्यालय की वार्डन कंचन कुमारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जिन महिला गार्डों को हटाया गया, उनकी कार्यशैली और विद्यालय के प्रति उनकी गतिविधियां संतोषजनक नहीं थीं. इसी कारण उनकी सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की गई थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय नियमों के तहत लिया गया है, किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं.

वार्डन ने बताया कि जिस महिला गार्ड का नाम विवाद में लिया जा रहा है, वह वर्तमान में मेडिकल अवकाश पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद सदस्य अर्चना प्रकाश इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देकर विद्यालय का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं. उनके अनुसार, विद्यालय में शिक्षा और छात्राओं के हितों के बजाय अनावश्यक विवाद पैदा किए जा रहे हैं. वार्डन ने यह भी कहा कि हटाई गई महिला गार्ड लगातार उनके खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि विद्यालय की छात्राओं के अभिभावक भी इस तरह के विवाद से नाराज हैं और वे भी पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन को आवेदन देने की तैयारी कर रहे हैं. फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं. मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंच चुकी है. अब सभी की नजर जिला प्रशासन की जांच पर टिकी है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस विवाद के पीछे वास्तविक कारण क्या है.

रिपोर्ट : धर्मेन्द्र कुमार