गढ़वा(GARHWA): जिले में बालू के अवैध खनन और भंडारण का मामला सामने आया है. एक तरफ वन विभाग ने इलाके को हाथियों के विचरण क्षेत्र का बोर्ड लगा रखा है, वहीं दूसरी तरफ यहां बड़े पैमाने पर बालू का अवैध कारोबार चलने का आरोप है. मामला धुरकी प्रखंड के माछपानी जंगल का है, जहां जिला टास्क फोर्स ने छापेमारी कर एक हजार से अधिक टिपर बालू जब्त की है. जब्त बालू की बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है.
NGT की रोक के दौरान भी जारी रहा अवैध कारोबार
NGT की रोक के दौरान पिछले चार महीनों से इलाके में अवैध बालू खनन और भंडारण की शिकायतें मिल रही थीं. जिले में ऐसे कई घाट होने की बात सामने आई है, जहां से अवैध रूप से बालू निकाले जाने का आरोप है. इससे सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, इस नुकसान का आधिकारिक आकलन सामने आना बाकी है.
रास्ता काटकर अधिकारियों को रोकने की कोशिश
DC PN मिश्रा के निर्देश पर गठित टास्क फोर्स जब छापेमारी के लिए पहुंची, तो उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बताया गया कि बालू माफियाओं ने JCB से रास्ता काट दिया था, ताकि अधिकारी नदी तक नहीं पहुंच सकें. इसके बाद टीम ने मोटरसाइकिल के सहारे जंगल के अंदर पहुंचकर कार्रवाई की.
कनहर नदी के एक तरफ झारखंड का गढ़वा जिला है, जबकि दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की सीमा पड़ती है. दुर्गम जंगल और सीमावर्ती इलाके का फायदा उठाकर अवैध कारोबार किए जाने की आशंका है.
अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
SDM प्रभाकर मिर्घा और जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव के मुताबिक, जब्त बालू के मामले में थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा. मामले की जांच कर अवैध खनन और भंडारण में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा.
रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कुमार