गढ़वा(GARHWA): नवरात्रि के दौरान मांस, मुर्गा और मछली की दुकानें बंद रखने के निर्देश को लेकर विवाद शुरू हो गया है. गढ़वा नगर परिषद की ओर से जारी नोटिस के बाद अब इस फैसले पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं. कोई इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर सही बता रहा है, तो कोई इसे लोगों की खान-पान की आजादी से जोड़कर सवाल उठा रहा है.
नगर परिषद ने क्यों जारी किया नोटिस?
दरअसल, नवरात्रि के दौरान गढ़वा शहर में कई जगहों पर पूजा पंडाल बनाए जाते हैं. इनमें कुछ पंडाल सड़कों और बाजारों के आसपास भी हैं. स्थानीय लोगों और पूजा समितियों की ओर से इन इलाकों में मांसाहारी दुकानों को बंद रखने की मांग की गई थी. बताया जा रहा है कि इस संबंध में नगर परिषद को आवेदन भी दिया गया था. इसके बाद दुकानदारों को दुकानें बंद रखने का नोटिस जारी किया गया.
नगर परिषद अध्यक्ष आशीष सोनी उर्फ दौलत सोनी इस फैसले के समर्थन में हैं. उनका कहना है कि सनातन धर्म के लोगों ने अपने पर्व को लेकर यह मांग की थी और नगर परिषद ने उसी के आधार पर कदम उठाया है.
फैसले पर मासूम खान ने उठाए सवाल
वहीं, मुस्लिम नेता मासूम खान ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि किसी दूसरे व्यक्ति के खान-पान पर रोक लगाने का फैसला उचित नहीं है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शहर में शराब की दुकानों के आसपास मंदिर और सरकारी स्कूल मौजूद हैं, तो इस पर कार्रवाई क्यों नहीं होती. मासूम खान का आरोप है कि इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम विवाद का रूप दिया जा रहा है.
फिलहाल, गढ़वा में इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है. एक तरफ लोग नवरात्रि के दौरान धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ खान-पान की आजादी और सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग उठ रही है. अब देखना होगा कि नगर परिषद के इस फैसले पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है.
रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कुमार