Jharkhand

गढ़वा: पक्के घर की चाह बना जान का काल, आवास योजना न मिलने पर महिला ने खाया जहर, सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
गढ़वा: पक्के घर की चाह बना जान का काल, आवास योजना न मिलने पर महिला ने खाया जहर, सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल

गढ़वा (GARHWA): झारखंड के गढ़वा जिले में पक्का घर नहीं मिलने की पीड़ा ने एक महिला की जान ले ली. मेराल प्रखंड के संगबरिया पंचायत अंतर्गत राजहरा गांव में आवास को लेकर पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के बाद महिला ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना के बाद राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना और केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं.

वहीं मृतका की पहचान रबीना खातून के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि वह अपने पति अनवर अंसारी के साथ लंबे समय से पक्के मकान के इंतजार में थी. परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि आवास नहीं मिलने के कारण परिवार में अक्सर तनाव और विवाद होता था. इसी कड़ी में हुए विवाद के बाद महिला ने कथित रूप से जहर खा लिया. गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई.

इधर घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि यदि पात्र परिवार को समय पर सरकारी आवास योजना का लाभ मिल गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था. उनका आरोप है कि कई जरूरतमंद परिवार वर्षों से आवास स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं.

ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर आवास योजना के लाभुकों के चयन और अनुशंसा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी के कारण कई गरीब परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं. इस मामले पर बीडीसी प्रतिनिधि रमेश बैठा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. उन्होंने कहा कि यदि मृतका का परिवार पात्र होने के बावजूद आवास योजना के लाभ से वंचित रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र के सभी आवासविहीन और पात्र परिवारों का दोबारा सर्वे कराया जाए तथा उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े. फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंच रहा है, जिनके लिए इन्हें शुरू किया गया था.

रिपोर्ट : धर्मेन्द्र कुमार