Jharkhand

गढ़वा में सूखे की आहट! जुलाई में सामान्य से 149.1 मिमी कम बारिश, अब तक सिर्फ 4.29% धान की रोपनी

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

गढ़वा (GARHWA):झारखंड के गढ़वा जिले में इस बार प्रकृति का अजीब खेल देखने को मिल रहा है. जिले के एक हिस्से में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो रही है, तो दूसरे हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है. समय पर मानसून सक्रिय नहीं होने, सामान्य से काफी कम बारिश और लगातार बिजली संकट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस साल की कमजोर बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

रोपनी की धीमी रफ्तार से किसानों में चिंता

कृषि विभाग के अनुसार, जिले में खरीफ सीजन के तहत 56,400 हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 2,420 हेक्टेयर भूमि पर ही रोपनी हो सकी है, जो लक्ष्य का महज 4.29 प्रतिशत है. रोपनी की धीमी रफ्तार से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.जुलाई महीने में जिले में 362.4 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले केवल 212.8 मिमी बारिश दर्ज की गई. यानी सामान्य से 149.1 मिमी कम वर्षा हुई. वहीं, पिछले वर्ष जुलाई में 381.9 मिमी बारिश हुई थी. पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में पानी की भारी कमी है और अधिकांश किसान अब तक धान की रोपनी शुरू नहीं कर पाए हैं. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है.

बिजली संकट ने भी किसानों की परेशानी दोगुनी कर दी है

बारिश की कमी के साथ-साथ बिजली संकट ने भी किसानों की परेशानी दोगुनी कर दी है. सबसे खराब स्थिति कांडी प्रखंड की बताई जा रही है. किसानों का आरोप है कि 24 घंटे में दो घंटे भी नियमित बिजली नहीं मिल रही है. सिंचाई के लिए बिजली चालित मोटरों पर निर्भर किसान पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे रोपनी का कार्य प्रभावित हो रहा है.फिलहाल किसान आसमान और प्रशासन, दोनों की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई और बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं आया, तो जिले में धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है.

कृषि पदाधिकारी ने क्या कहा?

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में अब तक अपेक्षा के अनुरूप बारिश नहीं हुई है, इसलिए धान की रोपनी भी काफी कम हुई है. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक बारिश का समय है और इस सप्ताह अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है. उम्मीद है कि बारिश होने पर धान की रोपनी में तेजी आएगी. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल धान पर निर्भर न रहें, बल्कि वैकल्पिक फसलों की खेती भी करें, ताकि नुकसान की भरपाई की जा सके.

रिपोर्ट-धर्मेंद्र कुमार