Jharkhand

रतन लकड़ा मौत मामला: आधी रात विधवा के घर मैनेज करने पहुंचे बैंक मैनेजर, ग्रामीणों ने किया ऐसा हाल, Video Viral

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

गढ़वा (GARHWA): झारखंड के गढ़वा जिले में वृद्ध पेंशनधारी रतन लकड़ा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा मामले में संज्ञान लेने और जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब एक नया विवाद सामने आया है. आरोप है कि झारखंड ग्रामीण बैंक, बड़गढ़ शाखा के मैनेजर और एक कर्मचारी देर रात मृतक के घर पहुंचे और मामले को "मैनेज" करने की कोशिश की. वहीं, दिन में प्रशासनिक जांच के दौरान परिजनों ने बैंक प्रबंधन पर लापरवाही, अमानवीय व्यवहार और रिश्वत मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

आधी रात मृतक के घर पहुंचे बैंक अधिकारी, ग्रामीणों ने किया विरोध
ग्रामीणों का आरोप है कि रतन लकड़ा की मौत के बाद कार्रवाई की आशंका से झारखंड ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक कृष्णा राम और बैंक कर्मचारी नंदलाल राम देर रात मृतक के घर पहुंचे. स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंककर्मी परिवार को समझाने और मामला शांत कराने का प्रयास कर रहे थे. जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, वे मौके पर पहुंच गए और बैंक अधिकारियों से इतनी रात में आने का कारण पूछा. ग्रामीणों का दावा है कि सवालों का जवाब देने के बजाय दोनों बैंककर्मी वहां से निकल गए. स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों के आने से पहले मृतक के घर की बिजली बंद करा दी गई थी. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शुरू हुई प्रशासनिक जांच
इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद गढ़वा प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है. एसडीएम और लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) ने संबंधित बैंक शाखा पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जांच की. अधिकारियों ने मृतक के परिजनों, बैंक कर्मचारियों, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अलग-अलग पूछताछ कर जानकारी जुटाई. जांच के दौरान मृतक की पत्नी रेपा लकड़ा, पुत्र अनिल लकड़ा और पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा के बयान दर्ज किए गए. परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि 75 वर्षीय रतन लकड़ा लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थे और उनकी वृद्धावस्था पेंशन ही इलाज का एकमात्र सहारा थी. इसके बावजूद बैंक ने ई-केवाईसी अपडेट नहीं होने का हवाला देकर कई महीनों तक भुगतान रोक दिया.

मानवीय आधार पर मदद नहीं मिली, रिश्वत मांगने का भी आरोप
परिजनों का आरोप है कि बीमारी के कारण रतन लकड़ा बैंक की दूसरी मंजिल तक नहीं जा सकते थे. उन्होंने कई बार बैंक कर्मियों से नीचे आकर बायोमेट्रिक सत्यापन करने का अनुरोध किया, लेकिन किसी ने मदद नहीं की.
मृतक की पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा ने जांच अधिकारियों को बताया कि जब उन्होंने शाखा प्रबंधक से मानवीय आधार पर सहायता की अपील की, तो कथित तौर पर उन्हें बैंक से बाहर निकालने के लिए कहा गया. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन्होंने बैंक कर्मियों द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत भी अधिकारियों से की है.

बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर बैंककर्मी घर पहुंचे और बिस्तर पर ही ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन इसके बाद भी पेंशन की राशि नहीं मिल सकी. परिजनों का कहना है कि यदि समय पर पैसे मिल जाते तो रतन लकड़ा का बेहतर इलाज संभव था और शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी.

दोषी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
जांच के बाद एसडीएम और एलडीएम ने कहा कि मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है. यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट जल्द ही उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर प्रशासन जांच में जुटा है, वहीं दूसरी ओर बैंक अधिकारियों के आधी रात मृतक के घर पहुंचने के आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

रिपोर्ट : धर्मेन्द्र कुमार