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Jharkhand

गढ़वा में दुर्गा माँ की अनोखी विदाई,भक्तों ने कंधे पर सवार कर परंपरा निभाया,नम हुई लोगों की आँख   

Samir Hussain
Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर

गढ़वा: जिले के प्रसिद्ध देवी मंदिर माँ गढ़देवी मंदिर मे स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन अनोखा होता है.  यंहा  भक्त माँ को अपने कंधे पर सवार कर विसर्जन की परंपरा को निभाया है.विसर्जन कार्यक्रम में लगभग पच्चास हजार शहरवासी शामिल हुए.

दशहरा के अवसर पर ऐतिहासिक मां गढ़देवी मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का मंगलवार को पारंपरिक तरीके से विसर्जन किया गया.  वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को कंधों पर उठाकर अंतिम विदाई दी.  इस दौरान महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण मां दुर्गा के जयकारों से गूंज उठा.

मां गढ़देवी मंदिर में स्थापित दुर्गा दरबार की प्रतिमा का दशमी के दिन पारंपरिक तरीके से विसर्जन किया गया. श्रद्धालुओं ने कंधों पर उठाई प्रतिमा, मां की अंतिम विदाई के लिए लोगों में दिखी विशेष उत्सुकता.  सोनपुरवा के रामबांध तालाब में विधि-विधान के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया. नौ दिनों की आराधना के बाद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी.  गढ़वा जिले में शांतिपूर्ण माहौल में दुर्गापूजा संपन्न हुई, विभिन्न पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया.

गढ़वा जिले में दशहरा का पर्व धार्मिक आस्था, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया.  नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद दशमी के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक मां गढ़देवी मंदिर में स्थापित दुर्गा दरबार की प्रतिमा का विसर्जन किया गया.इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.  मां की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर विदाई देने की परंपरा ने पूरे आयोजन को और भी अधिक विशेष बना दिया.  गढ़देवी मंदिर में प्रतिमा विसर्जन के साथ ही जिले के विभिन्न इलाकों में दशहरा उत्सव का पारंपरिक रूप से समापन हुआ. श्रद्धालुओं ने पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन किए और परिवार तथा समाज की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की.

रिपोर्ट: धर्मेन्द्र कुमार