Jharkhand

80 साल की उम्र में परीक्षा देने पहुंचा बुजुर्ग, तस्वीर देख लोगों ने कहा- सीखने की कोई उम्र नहीं होती

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

पूर्वी सिंहभूम (EAST SINGHBHUM): पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती. पूर्वी सिंहभूम में रविवार को इसकी एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली. यहां 60 से 70 साल की उम्र के महिला और पुरुष हाथ में कलम लेकर परीक्षा देने पहुंचे. उम्र ज्यादा थी, लेकिन पढ़ने और कुछ नया सीखने का उनका उत्साह बिल्कुल कम नहीं था.

उत्क्रमित उच्च विद्यालय झांझिया में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ‘उल्लास’ के तहत परीक्षा आयोजित की गई थी. इसमें उन लोगों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने बड़ी उम्र में पढ़ना-लिखना सीखा है. परीक्षा के दौरान कोई सवाल पढ़कर उसका जवाब लिख रहा था तो कोई हिसाब के सवाल हल करता नजर आया.

सबसे खास बात यह रही कि बड़ी उम्र के लोग भी बिना किसी झिझक के परीक्षा देने पहुंचे. 60 से 70 साल की उम्र में हाथ में कलम लेकर परीक्षा दे रहे इन लोगों को देखकर वहां मौजूद लोग भी काफी खुश नजर आए.

बड़ी उम्र में भी पढ़ाई को लेकर दिखा उत्साह

परीक्षा केंद्र पर सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे. परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से हुई. इसकी देखरेख स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक और केंद्र अधीक्षक आदित्य करण तथा झांझिया संकुल के सीआरपी सपन कुमार दत्ता ने की.

आदित्य करण ने कहा कि पढ़ने-लिखने के लिए उम्र कोई रुकावट नहीं है. जिस उम्र में आमतौर पर लोग पढ़ाई से काफी दूर हो चुके होते हैं, उस उम्र में ये महिला और पुरुष परीक्षा देने पहुंचे हैं. उनका यह उत्साह दूसरे लोगों के लिए भी सीख है.

उन्होंने बताया कि ‘उल्लास’ कार्यक्रम के जरिए लोगों को पढ़ना-लिखना और सामान्य हिसाब-किताब करना सिखाया जा रहा है. इसका फायदा उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में मिलता है. लोग अपना नाम लिखने, चीजों को पढ़ने और सामान्य हिसाब करने जैसे काम खुद कर सकते हैं.

परीक्षा कराने में शिक्षक संदीप कुमार अधिकारी, दुलाल सोरेन, अजीत कुमार सिंह, शिव शंकर दास और लिपिक लक्ष्मीकांत सिंह ने सहयोग किया.

60 से 70 साल की उम्र में परीक्षा देने पहुंचे इन लोगों का उत्साह यही बता रहा था कि अगर मन में सीखने की चाह हो तो उम्र सिर्फ एक नंबर है.

रिपोर्ट- अरुण बारिक