दुमका: दुमका जिला में इन दिनों बकरी पालन योजना को लेकर घमासान मचा हुआ है. खास बात यह है कि चर्चा झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना की नहीं, बल्कि यूके बेस्ड कंपनी रीयल वर्ल्ड एसेट्स (RWA) से जुड़ी कथित बकरी पालन योजना की है. मामला अब आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर दो अलग-अलग प्राथमिकी तक पहुंच गया है.
1.37 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से शुरू हुआ मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजुला मुर्मू ने खुद को पीड़ित बताते हुए दिग्घी ओपी में विनोद सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ 1.37 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और अन्य आरोपों को लेकर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई.
अब कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट
डॉ. अंजुला मुर्मू की प्राथमिकी में आरोपी बनाई गई सुष्मिता सोरेन ने अब पलटवार किया है. सुष्मिता सोरेन ने 4 सितंबर को नगर थाना में डॉ. अंजुला मुर्मू समेत दस लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है.इसके साथ ही मामला और पेचीदा हो गया है.
फर्जी बकरी पालन योजना’ के नाम पर ठगी का आरोप
नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी में सुष्मिता सोरेन ने डॉ. अंजुला मुर्मू और उनके सहयोगियों पर फर्जी बकरी पालन योजना के नाम पर ठगी करने, जाली दस्तावेज दिखाने और आपराधिक षडयंत्र रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी.
नगर थाना में कांड संख्या 164/26 दर्ज
सुष्मिता की शिकायत पर नगर थाना में कांड संख्या 164/26 दर्ज किया गया है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू कर दी है. अब पुलिस के सामने दोनों पक्षों के दावों और आरोपों की पड़ताल करना बड़ी चुनौती होगी.
एक तरफ अंजुला पीड़ित, दूसरी तरफ सुष्मिता का भी यही दावा
मामले की सबसे बड़ी पेचीदगी यही है कि पहली प्राथमिकी में डॉ. अंजुला मुर्मू खुद को पीड़ित बता रही हैं, जबकि दूसरी प्राथमिकी में आरोपी बनाई गई सुष्मिता सोरेन ने भी खुद को कथित तौर पर ठगी का शिकार बताया है. यानी एक ही मामले में दोनों पक्ष एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.
दो FIR के बाद बढ़े कई बड़े सवाल
RWA की कथित बकरी पालन योजना को लेकर अब तक दो प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं.ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है — योजना की वास्तविकता क्या थी? निवेशकों से कितना पैसा लिया गया? पैसा कहां गया? दस्तावेज असली थे या जाली? और आखिर इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी?
कौन पीड़ित और कौन आरोपी? जांच खोलेगी राज
फिलहाल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी.कौन वास्तव में पीड़ित है और किसकी भूमिका संदिग्ध है, यह पुलिस अनुसंधान और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट होगा. दोनों प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है.
बकरी पालन योजना से ज्यादा अब ‘करोड़ों’ की चर्चा
सरकारी बकरी पालन योजना जहां ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चलाई जाती है, वहीं RWA की कथित योजना को लेकर दुमका में अब बकरियों से ज्यादा करोड़ों रुपये के लेन देन और आरोप प्रत्यारोप की चर्चा हो रही है।.मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और आने वाले दिनों में जांच से कई नए तथ्य सामने आने की संभावना है
अब जांच की आंच किस-किस तक पहुंचेगी?
दो FIR के बाद निगाहें पुलिस की जांच पर टिक गई हैं.RWA की योजना क्या थी, इसका संचालन कैसे हो रहा था और निवेश के नाम पर हुए कथित लेन देन की असल कहानी क्या है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। कई सफेदपोश भी बेनकाब हो सकते हैं.
फिलहाल दुमका में सवाल एक ही है कि RWA की बकरी पालन योजना में आखिर असली पीड़ित कौन है और असली कहानी क्या है?
रिपोर्ट पंचम झा
