☰
Jharkhand

दुमका:मौत के बाद अपनों तक पहुंचाने वाला भी नहीं था,  बौडिया जन जन सेवा फाउंडेशन बना सहारा

Pancham Jha Dumka
Pancham Jha Dumka
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

दुमका जिला के रामगढ़ प्रखंड के कांजो पंचायत अंतर्गत डुमरजोर गांव निवासी मजदूर कामदेव सिरहा की ट्रेन में मौत के बाद बौडिया जन जन सेवा फाउंडेशन ने मानवता की मिसाल पेश की. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अपने परिजन का पार्थिव शरीर दूर प्रदेश से गांव तक ला सके. ऐसे कठिन समय में फाउंडेशन ने पहल करते हुए न केवल परिवार की मदद की, बल्कि स्वयं एंबुलेंस लेकर पहुंचा और कामदेव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव तक पहुंचाया.

मुंबई में मजदूरी कर चलाते थे परिवार

कामदेव सिरहा मुंबई के दादर में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे. वह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे. तबीयत खराब होने के बाद वह ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान 1 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर ट्रेन के सामान्य डिब्बे में उनकी मौत हो गई.

अचानक टूटा परिवार पर दुखों का पहाड़

कामदेव की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया. एक ओर घर के इकलौते कमाऊ सदस्य को खोने का सदमा, तो दूसरी ओर आर्थिक तंगी के कारण शव को गांव तक लाने की चिंता ने परिजनों की मुश्किल और बढ़ा दी. परिवार के सामने यह सवाल खड़ा था कि आखिर दूर प्रदेश से अपने प्रियजन का पार्थिव शरीर घर कैसे लाया जाए.

मुश्किल घड़ी में फाउंडेशन से मिली मदद

इसी दौरान परिजनों ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं बौडिया जन जन सेवा फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य ब्रह्मदेव दरवे से संपर्क किया. घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर कुमार को पूरे मामले से अवगत कराया. परिवार की परिस्थिति को देखते हुए दोनों ने तत्काल मदद के लिए आगे आने का निर्णय लिया.

खुद एंबुलेंस लेकर पहुंचे स्टेशन

ब्रह्मदेव दरवे और किशोर कुमार फाउंडेशन की एंबुलेंस लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचे. आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद कामदेव सिरहा के पार्थिव शरीर को लेकर एंबुलेंस से डुमरजोर गांव के लिए रवाना हुए. लंबी दूरी तय कर पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचाया गया.

शव पहुंचते ही गांव में पसरा मातम

कामदेव का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था. वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है.

ग्रामीणों ने प्रयास की सराहना की

इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े होने और पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने बौडिया जन जन सेवा फाउंडेशन, ब्रह्मदेव दरवे और किशोर कुमार के प्रयासों की सराहना की. ग्रामीणों ने कहा कि संकट के समय परिवार को सहारा देना और अंतिम यात्रा के लिए अपने स्तर से मदद करना सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है.

‘संकट में साथ खड़ा होना ही सच्ची मानव सेवा’

फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि किसी जरूरतमंद परिवार के संकट के समय उसके साथ खड़ा होना ही सच्ची मानव सेवा है. संस्था ने कहा कि भविष्य में भी जरूरतमंद, असहाय और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास जारी रहेगा.