☰
Jharkhand

दुमका: चोरों का आतंक! घर में सोते रहे बुजुर्ग, चोर खंगालते रहे पूरा मकान

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

दुमका (DUMKA): नगर थाना क्षेत्र का शास्त्री नगर मोहल्ले में रात के सन्नाटे में चोरों ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक के घर को निशाना बनाया. घर में पारस नाथ उपाध्याय अकेले सो रहे थे और इसी दौरान चोर खिड़की का ग्रील काटकर अंदर दाखिल हो गए.

लॉक तोड़ा, नकदी निकाली और घर को खंगाल डाला
चोरों ने पहले गोदरेज का लॉक तोड़ा और करीब एक लाख रुपये नकद निकाल लिए. इसके बाद उस हिस्से में भी घुसे जहां गृहस्वामी सो रहे थे. वहां से करीब 50 हजार रुपये, सोने की कई अंगूठियां और कागजात ले जाने की बात सामने आई है.

बुजुर्ग सोते रहे... चोरों का ऑपरेशन चलता रहा!
सबसे हैरान करने वाली बात यही है कि चोर घर के अंदर बेखौफ घूमते रहे और गृहस्वामी को इसकी भनक तक नहीं लगी. सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर चोरों का दुस्साहस इतना बढ़ा कैसे?

‘कुछ नहीं छोड़ा’... जाते-जाते टीवी भी उठा ले गए
नकदी और जेवर के बाद चोरों की नजर हॉल में लगे एलसीडी टीवी पर पड़ी. उसे भी साथ ले गए. यानी चोरों ने घर में सिर्फ चोरी नहीं की बल्कि पूरा हिसाब लगाकर सामान समेटा और निकल गए.

सुबह खुली आंख तो घर का हाल देखकर उड़ गए होश
सुबह गृहस्वामी की नींद खुली तो हॉल से टीवी गायब था. घर की स्थिति देखी तो चोरी का पूरा मामला सामने आया. इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र डॉ. राज कुमार उपाध्याय को जानकारी दी. ज्ञात हो कि डॉ राज कुमार उपाध्याय  अधिवक्ता सह वरिष्ठ पत्रकार है.

पुलिस पहुंची, अब CCTV बताएगा ‘कौन थे मेहमान’
सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल की जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.

शहर में पुलिस गश्त पर सवाल, चोरों के हौसले पर सवाल
शहर के एक मोहल्ले में खिड़की का ग्रील काटकर चोर अंदर घुसें, कमरों के लॉक तोड़ें, नकदी, जेवर समेटें और टीवी तक लेकर निकल जाएं तो सवाल सिर्फ चोरी का नहीं है.

सवाल यह भी है कि रात में शहर की सुरक्षा व्यवस्था आखिर कितनी चौकस थी?
पुलिस जांच करेगी, CCTV खंगालेगी और चोरों की तलाश होगी. लेकिन शास्त्री नगर की इस घटना ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि सवाल सीधा है अगर चोर घर के अंदर पहुंच सकते हैं, तो क्या शहर की सुरक्षा व्यवस्था अभी भी बाहर ही खड़ी है?

रिपोर्ट : पंचम झा