Jharkhand

दुमका: बंद पत्थर खदान बना मौत का कुआं, गिरकर किशोर की मौत,सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Pancham Jha Dumka
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
दुमका: बंद पत्थर खदान बना मौत का कुआं, गिरकर किशोर की मौत,सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

दुमका: दुमका जिला के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के कादर पोखर गांव स्थित बंद पत्थर खदान में गिरने से 15 वर्षीय किशोर सुखलाल देहरी की मौत हो गई. घटना चार दिन पहले शुक्रवार की बताई जा रही है, जबकि शव की तलाश के लिए सोमवार को एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची.

ननिहाल आया था किशोर, शुक्रवार शाम निकला था घर से

जानकारी के अनुसार करमाचुआँ गांव निवासी सुखलाल देहरी अपनी मां के साथ गमहार पहाड़ी स्थित ननिहाल आया हुआ था. शुक्रवार शाम वह दतवन लेकर घर से निकला और कादर पोखर स्थित बंद पत्थर खदान की ओर चला गया.

दतवन करते समय पड़ा मिर्गी का दौरा

परिजनों के अनुसार सुखलाल को मिर्गी की बीमारी थी. बताया जाता है कि खदान के किनारे बैठकर वह दतवन कर रहा था. इसी दौरान उसे अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा और संतुलन बिगड़ने से वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा.

ग्रामीणों ने दी सूचना, शुरू हुई शव की तलाश

घटना को आसपास मौजूद कुछ लोगों ने देखा और तत्काल इसकी जानकारी परिजनों को दी.सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा किशोर को खोजने का प्रयास शुरू किया

तीन दिनों तक परिजन ने किया प्रयास, नहीं मिली सफलता

परिवार के लोगों और ग्रामीणों ने लगातार तीन दिनों तक अपने स्तर से पानी में शव की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार मामले की सूचना प्रशासन और पुलिस को दी गई।

देवघर से पहुंची एनडीआरएफ टीम ने संभाला मोर्चा

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने देवघर से एनडीआरएफ टीम बुलाया. सोमवार को टीम घटनास्थल पर पहुंची और खदान के गहरे पानी में किशोर के शव की तलाश शुरू कर दी. समाचार लिखे जाने तक शव बरामद नहीं हो सका था.

मुखिया ने बताया, काफी प्रयास के बाद भी नहीं मिली सफलता

बांसपहाड़ी पंचायत के मुखिया कालिंद्र गृही ने बताया कि ग्रामीणों और परिजनों ने शव निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन खदान की गहराई और पानी की स्थिति के कारण सफलता नहीं मिल सकी.

पिता ने बताया, बीमारी बनी हादसे की वजह

मृतक के पिता प्रेमजीत देहरी ने बताया कि उनका पुत्र मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था. आशंका है कि दौरा पड़ने के कारण ही वह खदान के पानी में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई.

बंद खदानें बनीं खतरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़े पत्थर खदानों में बारिश का पानी भर जाने के कारण वे गहरे जलाशय का रूप ले चुके हैं.अधिकांश स्थानों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही सुरक्षा घेराबंदी की गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी खदानें लगातार हादसों का कारण बन रही हैं. उन्होंने प्रशासन से बंद खदानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और लोगों को जागरूक करने की मांग की है।/.