दुमका: दुमका के बासुकीनाथ धाम में विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला समाप्त हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है, लेकिन भाद्रपद यानी भादो मेला में भी देश विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है. फौजदारी बाबा पर जलार्पण करने आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन और सुखद अनुभूति देने के लिए प्रशासन हर वर्ष मुकम्मल व्यवस्था का दावा करता है लेकिन जमीनी तस्वीर इन दावों से अलग नजर आ रही है.
कागज पर मुकम्मल तैयारी, जमीन पर गंदगी ही गंदगी
भादो मेला के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों को लेकर भले ही बड़े बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन शिवगंगा से लेकर मेला क्षेत्र तक गंदगी का नजारा उन दावों की पोल खोलता दिखाई दे रहा है. जगह जगह कचरे का अंबार और अव्यवस्था श्रद्धालुओं के सामने स्वच्छता व्यवस्था की असली तस्वीर पेश कर रही है.
प्रदूषित शिवगंगा में आस्था की डुबकी, क्या यही है व्यवस्था?
बासुकीनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शिवगंगा आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है. लेकिन यदि शिवगंगा का पानी प्रदूषित हो और उसके आसपास गंदगी पसरी हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि श्रद्धालुओं को आखिर कैसी धार्मिक और स्वच्छ वातावरण की अनुभूति दी जा रही है? आस्था के नाम पर आने वाले श्रद्धालुओं को मजबूरी में गंदगी के बीच से गुजरना पड़ रहा है.
सफाई के लिए 23.94 लाख का टेंडर, फिर भी हालात बदतर
सबसे बड़ा सवाल सफाई पर खर्च होने वाली राशि को लेकर है। इस वर्ष भादो मेला के दौरान 31 दिनों की सफाई व्यवस्था के लिए 23 लाख 94 हजार 531 रुपये की निविदा हुई है. संवेदक को मेला क्षेत्र की बेहतर सफाई का निर्देश भी दिया गया. इसके बावजूद यदि जमीन पर अपेक्षित सफाई नजर नहीं आ रही है, तो सवाल है कि करीब 24 लाख रुपये की सफाई व्यवस्था का असर आखिर कहां दिखाई दे रहा है?
‘अनुभवी’ संवेदक भी नहीं बदल सका तस्वीर, अध्यक्ष ने उठाए सवाल
बासुकीनाथ नगर पंचायत अध्यक्ष वीणा देवी ने सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता. उन्होंने भादो मेला की सफाई निविदा में अनुभव प्रमाण पत्र की शर्त का विरोध किया था.उनका कहना है कि केवल पुराने लोगों को ही मौका देने के बजाय नए लोगों को भी काम का अवसर मिलना चाहिए.
‘राजा का बेटा राजा क्यों बने?’ अध्यक्ष की आपत्ति
अध्यक्ष वीणा देवी ने अनुभव की अनिवार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “राजा का बेटा राजा न बने, नए लोगों को भी मौका मिलना चाहिए.” उनका कहना है कि जिस संवेदक को अनुभव के आधार पर काम दिया गया, उसके बावजूद यदि मेला क्षेत्र में जगह जगह गंदगी दिखाई दे रही है, तो यह व्यवस्था के लिए शर्मनाक स्थिति है.
जनप्रतिनिधि बनाम अधिकारी की खींचतान का खामियाजा भुगत रहे श्रद्धालु
अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कार्यपालक पदाधिकारी फोन कॉल तक रिसीव नहीं करते. ऐसे आरोपों के बीच बासुकीनाथ नगर पंचायत में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच कथित खींचतान की तस्वीर भी सामने आ रही है. यदि आपसी समन्वय की कमी का असर सीधे सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है, तो इसका खामियाजा आम लोगों और श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है.
आस्था की नगरी की बदनामी आखिर किसके खाते में?
बासुकीनाथ सिर्फ एक नगर पंचायत नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां देश विदेश से लोग बाबा फौजदारी नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में गंदगी और अव्यवस्था की तस्वीरें श्रद्धालुओं के बीच कैसी छवि बनाती होंगी, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है.बदनामी आखिरकार पूरे शासन प्रशासन की होती है.
टेंडर से नहीं, जमीन पर सफाई से बनेगी बासुकीनाथ की पहचान
सफाई के नाम पर राशि खर्च होना और उसका असर जमीन पर दिखना, दोनों अलग बातें हैं. अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि आपसी खींचतान छोड़कर एक साथ बैठें और सफाई व्यवस्था की वास्तविक निगरानी सुनिश्चित करें। सवाल सिर्फ 24 लाख रुपये के टेंडर का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसकी वजह से श्रद्धालु बासुकीनाथ से साफ सफाई और आस्था की सुखद याद लेकर जाएं, न कि गंदगी की तस्वीर.
रिपोर्ट पंचम झा
