Jharkhand

श्रावणी मेला में अव्यवस्था का खेल: अस्थायी दुकानदारों से वसूली, लेकिन व्यवस्था नदारद

Pancham Jha Dumka
Pancham Jha Dumka
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

दुमका(DUMKA):विश्व प्रसिद्ध बासुकीनाथ धाम में राजकीय श्रावणी मेला चल रहा है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु फौजदारी बाबा पर जलार्पण के लिए पहुंच रहे हैं. मेले में दुमका ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती राज्यों से भी बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानदार अपनी दुकानें लगाने आते हैं. लेकिन इन दुकानदारों के लिए अब तक मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी है.

मेला से पहले होती है लंबी तैयारी, श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहता है जोर

जिला प्रशासन द्वारा श्रावणी मेला की तैयारियां महीनों पहले शुरू कर दी जाती हैं. लगातार बैठकें होती हैं और रणनीति बनाई जाती है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. एक ओर प्रशासन मेला क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराता है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत मेला क्षेत्र में दुकान लगाने वाले दुकानदारों से राजस्व वसूली के लिए क्षेत्र का डाक करती है.

व्यवस्था नहीं मिलने से सड़क पर सजने लगती हैं दुकानें

मेला शुरू होते ही बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानदार बासुकीनाथ पहुंचते हैं. लेकिन उनके लिए निर्धारित स्थान या समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे बीच सड़क पर ही दुकानें लगाने को मजबूर हो जाते हैं. यहीं से विरोधाभास की स्थिति पैदा होती है. एक तरफ प्रशासन सड़क खाली रखने का निर्देश देता है, दूसरी तरफ डाक लेने वाले संवेदक इन्हीं दुकानदारों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूलते हैं.

अधिकारी हटाते हैं दुकानें, फिर दोबारा लग जाती हैं

डीसी के निर्देश का पालन कराने जब दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी सड़क पर उतरते हैं तो दुकानदारों को अपनी दुकानें हटानी पड़ती हैं. लेकिन अधिकारियों के आगे बढ़ते ही फिर से सड़क पर दुकानदारी शुरू हो जाती है. दुकानदारों का कहना है कि जब वे सरकार को राजस्व दे रहे हैं तो बार-बार दुकान हटाने के लिए क्यों मजबूर किया जाता है.

राजस्व वसूली पर उठ रहे गंभीर सवाल

ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. यदि अस्थायी दुकानदारों से राजस्व वसूली वैध है, तो उनके लिए समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? जब जिला प्रशासन सड़क पर दुकान लगाने से मना करता है, तो फिर सड़क किनारे दुकानें लगवाकर वसूली कौन कर रहा है? और यदि यह वसूली अवैध है, तो इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?

अनहोनी हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?

श्रावणी मेले में हर दिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. ऐसे में सड़क पर बेतरतीब ढंग से लगी दुकानों के कारण किसी भी समय दुर्घटना या किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

रिपोर्ट-पंचम झा