टीएनपी डेस्क: झारखंड की उपराजधानी दुमका में इन दिनों कथित बकरी पालन योजना की खूब चर्चा है. योजना को कुछ लोगों के सामने कम समय में पैसा दोगुना करने के अवसर के रूप में पेश किया गया. मुनाफे के लालच में शहर के कई लोग इससे जुड़ते गए. अब मामला थाना पहुंचने के बाद इस कथित नेटवर्किंग योजना को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.
तस्वीर में दिख रहे चेहरे, अब जांच के घेरे में कहानी
तस्वीर में महिलाओं के समूह के बीच काला बंडी पहने नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान बिहार के नवादा निवासी विनोद सिंह के रूप में बताई जा रही है. वहीं, जिस महिला को माला पहनाई जा रही है, उनकी पहचान डॉ. अंजुला मुर्मू के रूप में है. डॉ. अंजुला मुर्मू दुमका के सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और पूर्व में झाविमो के टिकट पर दुमका विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं. वर्तमान में उन्हें भाजपा नेत्री के रूप में जाना जाता है.
सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी, धोखाधड़ी समेत कई गंभीर आरोप
डॉ. अंजुला मुर्मू ने दिग्घी ओपी में आवेदन देकर विनोद सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी, साइबर धोखाधड़ी, अवैध योजना संचालन और ब्लैकमेलिंग जैसे आरोप लगाए हैं. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फिलहाल सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी देने से बच रही है.
तस्वीर, वीडियो और ऑडियो ने बढ़ाए सवाल
इस मामले से जुड़ी कुछ तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो The News Post के हाथ लगे हैं. हालांकि, इन तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो की स्वतंत्र रूप से सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है. इनमें नजर आ रहे कुछ लोगों के कथित तौर पर रियल वर्ल्ड एसेट्स नामक नेटवर्किंग कंपनी से जुड़े होने की बात सामने आ रही है.
आठ महीने में रकम दोगुनी करने का दावा
बताया जा रहा है कि रियल वर्ल्ड एसेट्स नामक कंपनी के माध्यम से बकरी पालन योजना में निवेश के लिए लोगों को जोड़ा गया. कथित तौर पर निवेशकों को आठ महीने में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिया गया. स्कीम में प्रतिदिन 0.5 से 0.75 प्रतिशत तक रिटर्न मिलने का दावा किए जाने की बात भी सामने आ रही है.
विनोद सिंह को बताया जा रहा कथित मास्टरमाइंड
बिहार के नवादा निवासी विनोद सिंह को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. आरोपों के अनुसार यूके बेस्ड कंपनी से जुड़े विनोद सिंह ने डॉ. अंजुला मुर्मू को योजना से जोड़ा और उन्हें विश्वास में लिया. इसके बाद डॉ. अंजुला मुर्मू के माध्यम से उनके पारिवारिक सदस्यों समेत अन्य लोगों के इस योजना से जुड़ने की बात सामने आई.
पहले आया रिटर्न, फिर बढ़ता गया निवेश
योजना में शुरुआती दौर में निवेशकों को कथित तौर पर प्रतिदिन रिटर्न मिलने लगा. इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और देखते ही देखते कई लोग इसमें लाखों रुपये निवेश करने लगे. दुमका के कई नामचीन लोगों के भी योजना से जुड़ने की बात कही जा रही है.
13 अगस्त को बदली पूरी कहानी
बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये के निवेश के बाद अचानक 13 अगस्त से रियल वर्ल्ड एसेट्स नामक कंपनी इंटरनेट की दुनिया से गायब हो गई. विनोद सिंह का मोबाइल नंबर बंद बताया गया. जिस ऐप पर निवेशकों को बोनस और रिटर्न की राशि दिखाई जा रही थी, वह भी कथित तौर पर खुलना बंद हो गया. इसके बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई.
निवेशकों का बढ़ा दबाव, बैठकों का दौर चला
कंपनी के बंद होने के बाद निवेशकों ने डॉ. अंजुला मुर्मू से रकम वापसी को लेकर संपर्क करना शुरू किया. कई दौर की बैठकें भी हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद डॉ. अंजुला मुर्मू ने दिग्घी ओपी में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें विनोद सिंह समेत सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया.
अंजुला बोलीं—मैं खुद पीड़ित, साजिश के तहत बदनाम किया गया
डॉ. अंजुला मुर्मू ने खुद को इस मामले में पीड़ित बताते हुए कहा कि कंपनी से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उनका आरोप है कि साजिश के तहत उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में वास्तविकता सामने आ जाएगी. हालांकि, उन्होंने अन्य कई सवालों का जवाब देने से इनकार किया.
अब सामने आईं नामजद आरोपी सुष्मिता सोरेन
प्राथमिकी में नामजद आरोपी सुष्मिता सोरेन भी मीडिया के सामने आईं. उनका दावा है कि वह डॉ. अंजुला मुर्मू के कहने पर ही इस योजना से जुड़ी थीं. सुष्मिता के अनुसार, उन्होंने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए अथवा नकद राशि डॉ. अंजुला मुर्मू को दी थी.
फार्म हाउस दिखाकर बकरी पालन का दावा
सुष्मिता सोरेन का आरोप है कि मसलिया में डॉ. अंजुला मुर्मू की जमीन पर निर्माणाधीन फार्म हाउस दिखाकर बताया गया कि वहां बकरी पालन का काम किया जाएगा. उनके अनुसार, इसी भरोसे पर उन्होंने खुद निवेश किया और कई अन्य लोगों को भी योजना से जोड़कर उनसे राशि लेकर अंजुला मुर्मू को दी.
रकम वापसी का दबाव पड़ा तो पहुंच गया मामला थाना
सुष्मिता के मुताबिक कंपनी बंद होने के बाद निवेशकों ने अपनी रकम वापस लेने के लिए डॉ. अंजुला मुर्मू पर दबाव बनाया. उनका आरोप है कि रकम वापसी को लेकर विवाद बढ़ने के बाद अंजुला मुर्मू ने थाना में आवेदन देकर उन्हें ही नामजद आरोपी बना दिया. सुष्मिता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
एक करोड़ 37 लाख से शुरू, रकम कई करोड़ होने की आशंका
डॉ. अंजुला मुर्मू की ओर से दर्ज प्राथमिकी में करीब 1 करोड़ 37 लाख रुपये की धोखाधड़ी का जिक्र किया गया है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर निवेश की कुल रकम इससे कहीं अधिक होने की चर्चा है. कितनी राशि वास्तव में जमा हुई और कितने लोग प्रभावित हुए, इसका स्पष्ट खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा.
21 रुपये के बैलेंस ने खड़े किए बड़े सवाल
मामले में एक और सवाल यह उठ रहा है कि जिन खातों में रकम भेजे जाने की बात कही जा रही है, उनमें वर्तमान में कथित तौर पर मामूली राशि ही बची है. सूत्रों के अनुसार, विनोद सिंह के एक कथित खाते में महज 21 रुपये का बैलेंस बताया जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि निवेशकों का पैसा आखिर गया कहां?
कौन सच बोल रहा, जांच में खुलेगा राज
एक तरफ डॉ. अंजुला मुर्मू खुद को पीड़ित बताते हुए साजिश की बात कह रही हैं, तो दूसरी तरफ सुष्मिता सोरेन सहित कुछ निवेशक उनके माध्यम से योजना में जुड़ने और पैसा देने का दावा कर रहे हैं. दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास है. कौन पीड़ित और कौन आरोपी यह कहना फिलहाल मुश्किल है. अब पूरे मामले में बैंक खातों, लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड, कंपनी के दस्तावेज और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच अहम होगी.
नामचीन निवेशक भी खामोश, लोकलाज ने रोकी जुबान
इस कथित निवेश योजना में दुमका के कई नामचीन लोगों के जुड़ने की चर्चा है. हालांकि, रकम फंसने के बाद भी कई लोग सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं. लोकलाज और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण निवेशकों की यह चुप्पी मामले को और रहस्यमय बना रही है.
बकरी पालन की आड़ में नेटवर्किंग या वास्तविक कारोबार?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस योजना को बकरी पालन और वास्तविक संपत्ति से जुड़ा कारोबार बताया गया, उसमें निवेशकों को इतने अधिक दैनिक रिटर्न का कथित भरोसा कैसे दिया गया? क्या वास्तव में बकरी पालन का कारोबार चल रहा था या यह महज निवेश जुटाने का नेटवर्क था? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल से ही सामने आएगा.
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामला प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस के पास पहुंच चुका है. आरोप सही हैं या गलत, कितनी रकम का लेनदेन हुआ, योजना में किस-किस की भूमिका थी और निवेशकों की रकम आखिर कहां गई—इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे. फिलहाल प्रोफेसर साहिबा का बकरी प्रेम, कई निवेशक हुए हलाल और मामला पहुंचा थाना—इस पूरी कहानी ने दुमका में बकरी पालन योजना को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है.
