दुमका: स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर नवाचार की नई राह तलाश रहे एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, फिटकोरिया, दुमका के विद्यार्थियों ने दो अभिनव प्रयोग प्रस्तुत किए हैं. काठीकुंड स्थित विद्यालय के विद्यार्थियों ने मक्के के तने से गुड़ जैसा वैकल्पिक उत्पाद तैयार करने का प्रयास किया, वहीं नीम, तुलसी और लेमनग्रास जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से मच्छर भगाने वाला स्प्रे बनाने का प्रयोग भी किया. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और स्थानीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की समझ विकसित करना है.
प्रधानाचार्य के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की पहल
विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोरंजन केवट के मार्गदर्शन में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इन प्रयोगों को अंजाम दिया. जिला कल्याण पदाधिकारी गौतम मोदी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों ने नवाचार की दिशा में सराहनीय पहल की है. इस तरह के प्रयोग विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और अपनी रचनात्मक क्षमता को निखारने का अवसर देते हैं.
मक्के के तने से गुड़ जैसा उत्पाद बनाने का प्रयास
छात्रों ने अपने पहले प्रयोग में मक्के के तने का उपयोग कर गुड़ जैसा उत्पाद तैयार करने की संभावना तलाशने का प्रयास किया. इस प्रक्रिया में मक्के के तने के साथ नींबू, पपीता और भिंडी के रस का इस्तेमाल किया गया. इसका उद्देश्य ऐसा वैकल्पिक उत्पाद विकसित करने की संभावना तलाशना है, जिसमें सामान्य गुड़ की तुलना में शर्करा की मात्रा और ग्लाइसेमिक प्रभाव कम हो सकते हैं. हालांकि इन विशेषताओं की पुष्टि के लिए उत्पाद की शर्करा संरचना और ग्लाइसेमिक प्रभाव का वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होगा.
नीम, तुलसी और लेमनग्रास से मच्छर भगाने वाला स्प्रे
दूसरे प्रयोग में विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सामग्रियों से मच्छर भगाने वाला स्प्रे तैयार करने का प्रयास किया. इसके लिए नीम और तुलसी की पत्तियों, लेमनग्रास, कपूर तथा सिरके का उपयोग किया गया. इन सामग्रियों को पीसकर मिश्रण तैयार किया गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका अर्क निकालकर स्प्रे के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई. इस प्रयोग के जरिए विद्यार्थियों ने प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित विकल्प की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया. हालांकि स्प्रे की प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हैं.
पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने पर जोर
प्रधानाचार्य मनोरंजन केवट ने कहा कि हमारी परंपरा में प्रकृति के साथ सह अस्तित्व और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की समृद्ध समझ रही है. जरूरत इस ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने और स्थानीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सीखने की है. उन्होंने कहा कि जनजातीय बच्चों में ज्ञान की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है.
किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर प्रयोग से सीखेंगे विद्यार्थी
प्रधानाचार्य के अनुसार ऐसे प्रयोग विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने के साथ यह समझ भी मजबूत करते हैं कि विज्ञान केवल किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे आसपास उपलब्ध संसाधनों में भी अभिनव प्रयोग की संभावनाएं मौजूद हैं. विद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, नवाचार और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
स्थानीय संसाधनों से नवाचार की नई संभावनाएं
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, फिटकोरिया के विद्यार्थियों के ये प्रयोग स्थानीय संसाधनों को नए नजरिए से देखने और पारंपरिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ने का प्रयास हैं. अब इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और सुरक्षा का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना महत्वपूर्ण होगा, ताकि विद्यार्थियों की रचनात्मक पहल को आगे शोध और उपयोगी नवाचार में बदला जा सके.