दुमका (DUMKA): शिक्षा केवल किताबों, कक्षाओं और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यही बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में आगे बढ़ने के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें सिस्टम की एक चूक का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में विद्यालय स्तर पर हुई किसी त्रुटि का असर यदि एक साथ दर्जनों विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम पर पड़े, तो मामला महज रिजल्ट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है.
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी का है मामला
दुमका जिला के जामा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी में जैक बोर्ड द्वारा आयोजित आठवीं बोर्ड परीक्षा का ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विद्यालय में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी 27 विद्यार्थी फेल घोषित कर दिए गए. हैरानी की बात यह है कि विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक के अनुसार, इसकी वजह विद्यार्थियों की पढ़ाई या परीक्षा नहीं, बल्कि आंतरिक मूल्यांकन के अंक अपलोड करने में हुई त्रुटि बताई जा रही है.
एक विद्यालय, 27 परीक्षार्थी और सभी फेल
मामला दुमका जिले के जामा प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी का है.विद्यालय में करीब 150 विद्यार्थी नामांकित हैं और छह शिक्षक कार्यरत हैं. वर्ष 2026 की आठवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यालय में नामांकित सभी 27 विद्यार्थी फेल घोषित कर दिए गए. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों ने परीक्षा ठीक से दी थी. कुछ विद्यार्थियों का असफल होना समझ में आता है, लेकिन एक ही विद्यालय के सभी 27 विद्यार्थियों का फेल होना सवाल खड़े करता है.
27 बच्चों के फेल होने पर उठे सवाल, गलती आखिर कहां हुई?
मामले को लेकर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि आंतरिक मूल्यांकन के अंक अपलोड करने में हुई त्रुटि के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। उनके अनुसार, अंक प्रधानाध्यापक द्वारा अपलोड किया जाना था, लेकिन कैफे से अपलोड कराने के दौरान त्रुटि हो गई. उन्होंने बताया कि विषयवार सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण हैं और इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है.
कैफे से अंक अपलोड कराने की चूक ने बढ़ाई परेशानी
प्रभारी प्रधानाध्यापक के अनुसार, सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए साइट खुलने के बाद सभी विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के अंक दोबारा अपलोड किया जा चुका है. फिलहाल सप्लीमेंट्री परीक्षा के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.
गलती स्कूल स्तर पर, असर बच्चों की पढ़ाई पर
छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि आंतरिक मूल्यांकन के अंकों में हुई गड़बड़ी के कारण उन्हें फेल घोषित किया गया. सवाल यह है कि यदि अंक अपलोड करने में विद्यालय स्तर पर त्रुटि हुई है, तो उसका खामियाजा विद्यार्थियों को क्यों भुगतना पड़े? बच्चों ने परीक्षा दी, परिणाम की प्रतीक्षा की और अब परिणाम के कारण उनकी अगली कक्षा में पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
27 बच्चों की पढ़ाई पर लगा ब्रेक, दाखिले का संकट
आठवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को अगली कक्षा में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई आगे बढ़ानी थी. लेकिन परीक्षा परिणाम में फेल घोषित होने के कारण विद्यार्थियों के सामने अगली कक्षा में नामांकन का संकट खड़ा हो गया है. एक साथ 27 विद्यार्थियों का प्रभावित होना विद्यालय की व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
आंतरिक मूल्यांकन के अंक बने बच्चों के लिए मुसीबत
आंतरिक मूल्यांकन के अंक परीक्षा परिणाम का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं. ऐसे में इन अंकों को दर्ज करने, सत्यापित करने और पोर्टल पर अपलोड करने में किसी भी स्तर की चूक विद्यार्थियों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है. पंचरुखी विद्यालय का मामला इसी व्यवस्था की संवेदनशीलता को सामने लाता है.
अभिभावकों का सवाल : बच्चों की गलती क्या थी?
अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आंतरिक मूल्यांकन के अंक अपलोड करने में विद्यालय स्तर पर त्रुटि हुई, तो इसकी सजा बच्चों को क्यों मिले? उनका कहना है कि विद्यार्थियों ने अपनी ओर से परीक्षा दी थी और अब परिणाम की तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है.
शिक्षा विभाग ने लिया संज्ञान, जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन
मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक लक्ष्मण यादव ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है.उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. विभाग के स्तर से आंतरिक मूल्यांकन के अंकों, संबंधित रिकॉर्ड और अपलोड प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि त्रुटि किस स्तर पर हुई.
अब सवाल कार्रवाई से ज्यादा समाधान का
मामले में सबसे जरूरी है कि जांच के साथ विद्यार्थियों के हित में तत्काल समाधान निकाला जाए। यदि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा परिणाम आंतरिक मूल्यांकन के अंकों की अपलोडिंग में हुई त्रुटि से प्रभावित हुआ है, तो विद्यार्थियों को अनावश्यक रूप से शैक्षणिक नुकसान नहीं होना चाहिए.
एक गलती की कीमत 27 बच्चों का भविष्य नहीं हो सकती
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के परिणाम और शैक्षणिक प्रक्रिया की शुद्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. पंचरुखी विद्यालय में 27 विद्यार्थियों के एक साथ फेल होने का मामला अब केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि जवाबदेही, रिकॉर्ड सत्यापन और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने की परीक्षा बन गया है.
रिपोर्ट: पंचम झा
