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Jharkhand

झारखंड कांग्रेस की दिल्ली रैली में गुटबाजी पर आलाकमान की नजर गई तो किन -किन पर गिर सकती है गाज,पढ़िए 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD) : बहु प्रचारित और बहु प्रतीक्षित रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली खत्म हो गई है.  "देश बचाओ -वोट बचाओ" ,इस रैली में जगह-जगह के कांग्रेस कार्यकर्ताओं-नेताओं  ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की.  तमाम विपक्षी दल के बड़े नेता भी मौजूद रहकर हुंकार भरी.  रैली खत्म होने के बाद अब इस बात की भी चर्चा हो रही है कि किस नेता के साथ कितने अधिक लोग गए थे.  यह  अलग बात है कि सोशल मीडिया पर अपनी "ताकत" दिखाने की कोशिश की गई है ,अभी भी की जा रही है.  बावजूद किसके साथ समर्थकों का हुजूम था, इसकी गणना  अब शुरू हो गई है.  झारखंड से भी बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने रैली में हिस्सा लिया।  इसकी तैयारी बहुत पहले से चल रही थी.  लगातार बैठकों का दौर जारी था. 

हो रहा आकलन ,किसके साथ थी कितनी भीड़ 
 
झारखंड से मंत्री से लेकर नेता -कार्यकर्ता तक शामिल हुए.  अब आकलन हो रहा है कि किस नेता के साथ अधिक भीड़ थी ? मतलब अब झारखंड में यहां से गए लोगो के साथ  भीड़ की गणना हो रही है.  धनबाद में भी ऐसी कुछ चर्चा चल रही है.  यह  अलग बात है कि अभी दिल्ली गए सभी नेता और कार्यकर्ता लौटे  नहीं हैं.  धीरे-धीरे सुविधा के अनुसार लौटेंगें।  कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर कहीं भोजन की तस्वीर डाल रहे हैं, तो कहीं नारेबाजी करते हुए तस्वीर डाल रहे है.  लेकिन कांग्रेस के ही नेताओं की बात मानी जाए तो झारखंड कांग्रेस में गुटबाजी अभी भी खत्म  नहीं हुई है. 

झारखण्ड कांग्रेस में क्यों छिड़ी है सबसे बड़ा आदिवासी नेता की जंग 

झारखण्ड कांग्रेस में सबसे  बड़े आदिवासी नेता कौन ,इसकी भी लड़ाई छिड़ी हुई है.  रामलीला मैदान की रैली में भी गुटबाजी की झलक दिखी।  बताया जाता है कि कांग्रेस नेता बंधु तिर्की अपने अलग ही अंदाज में झारखंड की संस्कृति को साथ लेकर भीड़ के साथ रैली में पहुंचे थे.  तो धीरज साहू और प्रदीप बलमुचू का अलग ही ग्रुप दिखा।  इसी तरह शेष जो बचे , वह प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में दिल्ली रैली में दिखाई दिए.  केशव महतो कमलेश का कहना है कि  रामलीला मैदान में उमड़ा जन सैलाब इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता लोकतंत्र को कमजोर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगी।  खैर, रैली में पूरे देश से पहुंचे लोगों की गणना कांग्रेस आलाकमान करेगा ,कर भी रहा होगा, लेकिन झारखंड में गुटबाजी का नजारा एक बार फिर दिखा रैली में. 

गुटबाजी  से कौन कमजोर होगा ,किसकी बढ़ेगी ताकत 

यह गुटबाजी  किसकी सेहत को कितना कमजोर अथवा कितना मजबूत करेगा ,इसके लिए इंतजार करना होगा। जहां तमाम विपक्षी दल के बड़े-बड़े नेता एक मंच पर दिखे ,एक साथ हुंकार भरते दिखे, वही झारखंड में कांग्रेस के अलग-अलग गुट  के लोग अपने-अपने तरीके से रैली में हिस्सा लिया।  ऐसी बात नहीं है कि इस बात की नोटिस नहीं ली गई है.  चर्चा शुरू हो गई है, चर्चा शुरू हुई है तो आगे भी जाएगी।  ऐसे  में झारखंड कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेताओं के लिए परेशानी भी हो सकती है.  वैसे भी, झारखंड में कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर कई बार रांची से लेकर दिल्ली तक बैठकें  हो चुकी है.  बैठकों में कड़ा आदेश के बावजूद नेताओं की गुटबाजी पूरी तरह से खत्म नहीं हो रही है.  वैसे भी, झारखंड कांग्रेस गुटबाजी के लिए बदनाम रही है.