Jharkhand

Coal India को क्या अब केवल अधिकारी ही चलाएंगे, पढ़िए-क्यों चारो तरफ से उठ रही है यह आवाज़ ?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद (DHANBAD): देश ही नहीं दुनिया की, सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया अब कोयले से आगे बढ़ गई है. नए-नए क्षेत्रों में उसने कदम बढ़ाया है. जाहिर है कोयला उद्योग में प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री के बाद कोल् इंडिया की यह मजबूरी हो सकती है. लेकिन एक आंकड़ा बता रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष के 5 महीने में कोल इंडिया में कुल 3450 मैनपावर की कमी आई है. जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआत में 2,12,066 कोयलाकर्मी थे. 1 सितंबर 26 को यह संख्या घटकर 2,08,616 रह गई है. 

बीसीसीएल में पहली सितम्बर को मैनपावर की संख्या 29741 रह गई
 
बताया गया है कि कोल् इंडिया के सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल में पहली सितम्बर को मैनपावर की संख्या 29741 रह गई है, जबकि ईसीएल में 43, 447 है. सीसीएल में 31,726 है. वहीं डब्लूसीएल में 30,898 है. SECL में 35,703 रह गई है. MCL में 20,482, NCL में 12921, CMPDIL में 2,592 NEC में 457, कोल इंडिया मुख्यालय में संख्या 649 है. कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाइयों में मैनपॉवर कमी लगातार जारी है. ईसीएल में 1045 कर्मियों की कमी हुई है. बीसीसीएल में 620, सीसीएल में 359, डब्लूसीएलमें 435 कर्मियों की कमी हुई है. ज्यादातर कर्मी सेवानिवृत हो रहे हैं. इस वजह से कमी आई है. हालांकि अब खनन आउटसोर्सिंग, एमडीओ आदि के माध्यम से ज्यादा हो रहा है. 

भूमि के बदले ही केवल मिल रहा है नियोजन 

इसके बदले अनुकंपा और भूमि के बदले नियोजन ही मिल रहा है. वैधानिक पदों को छोड़कर गैर अधिकारियों के लिए वैकेंसी नहीं आ रही है. अधिकारियों की नियुक्ति के लिए तो वैकेंसी आ रही है, लेकिन कर्मियों की नियुक्ति के लिए रिक्ति नहीं निकाली जा रही है. कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय का और आज का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है. 2004 के लगभग जब कोयला उद्योग में आउटसोर्सिंग कंपनियों का प्रवेश हुआ, उस समय से मैनपावर की संख्या लगातार घट रही है. मैनपावर  रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नियुक्तियां नहीं आ रही हैं. 

आउटसोर्सिंग कंपनियों का बढ़ाता चला गया है प्रचलन 
 
उल्टे सभी कंपनियां में कहा जा रहा है कि सरप्लस मैनपावर हैं. दरअसल, आउटसोर्सिंग कंपनियों की निगरानी कंपनी के जिम्मे में होती है. टेंडर के हिसाब से आउटसोर्सिंग कंपनियों को पैच अलॉट कर दिया जाता है. निर्धारित कर दिया जाता है कि उन्हें प्रतिदिन कितना कोयला निकालना है और उसके एवज में उन्हें कितना का भुगतान होगा. आउटसोर्सिंग कंपनियों  के टेंडर में भी गड़बड़ियां सामने आती रही हैं. यही हाल रहा तो कोयला उद्योग अब प्राइवेट प्लेयर्स के हवाले हो जाएगा. मजदूर संगठनों की ताकत भी घट रही है. चार लेबर कोड को लेकर अभी भी कोल इंडिया में हलचल है. जेबीसीसीआई का गठन नहीं हुआ है. 12 वें जेबीसीसीआई के गठन को लेकर कोई स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.