धनबाद (DHANBAD): झारखंड में जगुआर के करीब 2700 अधिकारी और जवान हैं. झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चले अभियान के बाद अब राज्य की सबसे विशेष पुलिस यूनिट झारखंड जगुआर को नई चुनौतियों के अनुसार ढालने की तैयारी शुरू हो गई है. झारखंड में जब नक्सलवाद चरम पर था, तो 2008 में झारखंड जगुआर का गठन किया गया था. लेकिन अब नक्सलवाद का खत्म हो चुका है, तो झारखंड जगुआर के स्वरूप को बदलने की तैयारी शुरू हो गई है. झारखंड में अब एसटीएफ की तर्ज पर यह यूनिट काम कर सकती है. इसके लिए झारखंड जगुआर का पुनर्गठन किया जा सकता है.
जगुआर की जगह एसटीएफ के गठन का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार इसके लिए इसी महीने बैठक बुलाई गई थी, लेकिन किन्ही कारणों से यह बैठक स्थगित हो गई. अभी तक अगली बैठक की तिथि की सूचना सामने नहीं आई है. सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस पर विचार कर रही है कि जगुआर की जगह गठित होने वाले एसटीएफ का उपयोग राज्य में सक्रिय विभिन्न अपराधियों और साइबर अपराधियों के खिलाफ किया जा सकता है. सूत्र बता रहे हैं कि डीजीपी ने झारखंड जगुआर के पुनर्गठन को लेकर एक रूपरेखा तैयार की है. इसको लेकर डीजीपी ने एक बैठक भी बुलाई थी, लेकिन फिलहाल बैठक कुछ कारणों से टाल दी गई है.
झारखंड जगुआर का गठन नक्सलियों से लड़ाई के लिए हुआ था
जानकारी के अनुसार झारखंड में अब कोई भी जिला नक्सलियों के प्रभाव में नहीं है. झारखंड जगुआर का गठन नक्सलियों से लड़ाई के लिए ही हुआ था. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जगुआर की जगह प्रस्तावित एसटीएफ को अब झारखंड में संगठित अपराध, कुख्यात अपराधियों के खिलाफ छापेमारी अभियान में लगाया जाएगा. वैसे भी, झारखंड में अभी अपराधियों के खिलाफ पुलिस का एक्शन तेज है. धनबाद, जमशेदपुर, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, पलामू, चतरा, जामताड़ा समेत अन्य जिलों में कुख्यात अपराधियों, गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस ने एक्शन तेज कर दिया है. अपराधी और पुलिस के बीच एनकाउंटर की कई घटनाएं हुई हैं. एक आंकड़े के अनुसार पिछले साल जनवरी महीने से लेकर 14 अक्टूबर 26 तक लगभग 17 एनकाउंटर हुए हैं. इनमें से चार अपराधी ढेर किए गए हैं तो 20 से अधिक अपराधी घायल हुए है.
