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Jharkhand

झारखंड में भाजपा अब क्यों बदली -बदली दिखेगी? गिरिडीह उपचुनाव को लेकर क्या है पार्टी का हिडेन एजेंडा ?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHNBAD) : झारखंड में अब क्या भाजपा अपनी राजनीति आक्रामक करेगी? क्या गिरिडीह उपचुनाव के पहले भाजपा जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरेगी? क्या झारखंड बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल संगठन में नई जान फूंक सकेंगे? यह सब सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद उन्होंने हेमंत सरकार पर जमकर हमला बोला ।  प्रदेश प्रभारी ने  संवाददाताओं से भी बातचीत की.  प्रदेश प्रभारी के रूप में आज उनकी पहली प्रेस वार्ता थी.  उन्होंने सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाये।  पार्टी ने स्पष्ट किया कि  जनता के मुद्दों पर वह राज्य सरकार को लगातार घेरती रहेगी। 

जनता से जुड़े मुद्दे पर जवाब देने के लिए सरकार को बाध्य  करने की  घोषणा
 
संगठन आने वाले दिनों में सरकार की नीतियों और कामकाज के तरीकों पर अपना विरोध तेज करेगा।  भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता से जो वादे किए गए थे, वह पूरे नहीं हुए.  स्वास्थ्य ,शिक्षा, रोजगार और सिंचाई जैसे बुनियादी क्षेत्र में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं.  जमीन, बालू और खनिज संसाधनों से जुड़े मामले को लेकर भी सवाल पर उठाए गए.  वित्तीय अनियमिताओं का आरोप लगाया गया.  रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे को भी उठाया गया.  महिला सुरक्षा पर भी सरकार पर निशाना साधा गया.  जनता से जुड़े मुद्दे पर जवाब देने के लिए सरकार को बाध्य  करने की भी घोषणा की गई.  

गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेवारी दी गई है

बता दे कि  अभी हाल ही में गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेवारी दी गई है.  गजेंद्र सिंह पटेल मध्य प्रदेश के सांसद और बड़े आदिवासी नेता हैं.  इसके अलावा छत्तीसगढ़ के सौरभ सिंह और बिहार के निवेदिता सिंह झारखंड बीजेपी के सह  प्रभारी बने हैं  पवन साय को प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है.  भाजपा ने संगठन के लगभग सभी बड़े चेहरों को बदल दिया है.  अब नए चेहरों के लिए भी झारखंड में भाजपा के संगठन को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती होगी।  गिरिडीह में उपचुनाव भी होने जा रहा है.   भाजपा के लिए झारखंड में उपचुनाव सुखद नहीं रहा है.  परिणाम प्रतिकूल रहा है.  ऐसे में नए नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है. 

2020 में दुमका में भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी.  झामुमो के बसंत सोरेन जीते थे.

 उल्लेखनीय है कि  2020 में दुमका में भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी.  झामुमो के बसंत सोरेन जीते थे.  2020 में ही बेरमो उपचुनाव की बात हो  तो कांग्रेस के अनूप सिंह को जीत मिली थी.  भाजपा दूसरे स्थान पर थी.  2021 में मधुपुर उपचुनाव की चर्चा हो  तो झामुमो के हफीजुल हसन चुनाव जीते थे.  भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी.  2022 में मांडर उपचुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस की  शिल्पी नेहा तिर्की  चुनाव जीती थी.  भाजपा दूसरे स्थान पर थी.  2023 में रामगढ़ उपचुनाव की बात हो तो आजसू  की सुनीता चौधरी चुनाव जीती थी.  

गिरिडीह उपचुनाव को लेकर भाजपा हो गई है रेस 

2023 में डुमरी की बात की जाए तो झामुमो  की बेबी देवी  चुनाव जीती थी.  भाजपा ने आजसू  उम्मीदवार को समर्थन किया था.  2024 में गांडेय उप  चुनाव की बात की जाए तो झामुमो की कल्पना सोरेन  चुनाव जीती थी.  भाजपा दूसरे स्थान पर रही.  2025 में घाटशिला की बात की जाए तो झामुमो  के सोमेश चंद्र सोरेन चुनाव जीते , भाजपा दूसरे स्थान पर रही.  अब गिरिडीह में भी उपचुनाव होने जा रहा है.  2019 से यहां झामुमो  की जीत होती रही है.  2024 की आम चुनाव  की बात की जाए, तो झामुमो  में और भाजपा  में बहुत करीबी मुकाबला था और लगभग 4000 वोटो से जीत- हार तय हुई थी.  सुदिव्य  कुमार सोनू (अब स्वर्गीय) ने निर्भय कुमार शाहबादी  को हराया था.