धनबाद (DHANBAD): अब तो कतरास के अस्तित्व पर ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है. आगे चलकर कतरास बचेगा या जमीन में समा जाएगा, यह एक बड़ा सवाल उभर कर सामने खड़ा है. जिस कतरास में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगी, जिस कतरास ने बिहार से लेकर झारखंड तक अपनी आंचल से मंत्री पद दिया, जिस कतरास ने अविभाजित बिहार की सबसे धनी जिला परिषद का अध्यक्ष दिया, जिस कतरास ने रामानंद खेतान जैसे स्वतंत्रता सेनानी दिया, जिस कतरास ने ढुल्लू महतो को सांसद बनाया, उस कतरास पर आज अस्तित्व का संकट है. अविवाजित बिहार में ओपी लाल चुनाव जीतकर मंत्री बने, तो झारखंड बनने के बाद जलेश्वर महतो झारखंड में मंत्री बने. धनबाद जिला परिषद के अध्यक्ष सत्यदेव बाबू लंबे समय तक रहे. उस समय कतरास का अपना रुतबा था, बोलबाला था.
जानिए एक साल में कितने लोग हुए काल कवलित
कतरास के ही रहनेवाले सत्यदेव सिंह के अग्रज शंकर दयाल सिंह विधायक ,सांसद से लेकर बिहार के मंत्री तक रहे. बबन सिंह की चाय और गोपाली का रसगुल्ला आज भी पुराने लोग जरूर याद करते होंगें. कोई भरोसा करें अथवा नहीं करें, लेकिन धनबाद से 16-17 किलोमीटर दूर लोग सिर्फ चाय पीने के लिए जाते थे. लेकिन आज कतरास जाने में लोग डर रहे है. कब कहां जमीन धंस जाए, कब लोगों की जान चली जाए, यह नहीं कहा जा सकता है. अगर आंकड़े पर गौर करें तो पिछले 1 साल में दर्जन भर से अधिक लोगों की मौतें हो गई है. घर तो बहुत जमींदोज हुए, प्रभावित लोग आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे है. कतरास क्षेत्र में भू धंसान की बढ़ती घटनाओं से लोग चिंतित हैं.
जमीन अगर खोखली हो गई है तो ऊपर आबादी क्यों ?
कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग, पुरानी खदानों की वजह से खाली हुए स्थान और अवैध उत्खनन के कारण जमीन पूरी तरह से खोखली हो गई है. रविवार को रामकनाली क्षेत्र में हुई घटना एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. कतरास का इलाका ऊपर से तो सब सामान्य दिखता है, लेकिन जमीन के नीचे सुलगती आग, जहरीली गैस और पहले के खनन और हाल के दिनों में अवैध उत्खनन के कारण भीतर से जमीन पूरी तरह से खोखली हो गई है. जैसे ही बरसात का पानी प्रवेश करता है, मिट्टी गीली हो जाती है और जमीन फट जाती है. घटना जब होती है, तो नेता पहुंचते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पुनर्वास का दावा करते हैं. कहते हैं कि बीसीसीएल के सीएमडी से उनकी सीधी बात होती है. लेकिन कोई एक्शन होता नहीं है.
छाताबाद की घटना ने कैसे सब को कर दिया एक्सपोज़
अगर हाल में छाताबाद की घटना को ही ले लिया जाए, तो एक तरह से पूरी झारखंड सरकार छाताबाद पहुंची थी. झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के नेतृत्व में एक टीम पहुंची थी. उस टीम में बेरमो विधायक, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री शामिल थे और दावा किया गया था कि जल्द सब कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा. उसके बाद झारखंड सरकार के एक और मंत्री आए, लोगों के साथ बैठक की. आंदोलन समाप्त कराया, सर्वे की बात तय हुई और उसके बाद फिर लगातार घटनाएं हो रही हैं. सवाल उठता है कि क्या पूरे कतरास इलाके का कभी सर्वे कराया गया है? आखिर कैसे पता चलेगा कि कतरास का कौन-कौन इलाका अ सुरक्षित है. दरअसल, आरोप लगते रहे हैं कि कोलियारियों में कोयला खनन के बाद जो पिलर छोड़े गए थे, उन पिलरों को अवैध उत्खनन के दौरान काट लिया गया है और अब कतरास पर संकट है.
अब आप अंदाज करिए कि केशलपुर मुंडा थोड़ा में रविवार को जब एक साथ तीन लाश से पहुंची होगी, तो वहां का क्या दृश्य होगा? अगर डेंजर जोन में लोग रह रहे हैं तो उन्हें बचाने की जिम्मेदारी किसकी है? बाघमारा विधानसभा क्षेत्र, जिसके अंतर्गत कतरास आता है, वहां के तीन बार के विधायक फिलहाल धनबाद के सांसद हैं. सांसद ढुल्लू महतो के भाई शत्रुघ्न महतो फिलहाल बाघमारा से विधायक है. केंद्र में भाजपा की सरकार है, फिर भी पता नहीं क्यों ,मामले का समाधान नहीं हो रहा है. यह अलग बात है कि बाघमारा विधानसभा क्षेत्र गिरिडीह के संसदीय क्षेत्र में आता है और गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी है. मतलब दो सांसदों का इलाका त्राहि त्राहि कर रहा है. लोग जीवन और मौत से जूझ रहे हैं, फिर भी उन्हें उचित पुनर्वास नहीं मिल रहा है, यह एक बड़ा सवाल है. नेता झारखंड सरकार को जिम्मेवार बताते हैं और झारखंड सरकार में शामिल पार्टी के नेता बीसीसीएल और सीआईएसएफ को जवाबदेह कहते ही. लेकिन आखिर किसकी जवाबदेहि है, यह कभी कोई तय नहीं करता. नतीजा है कि चींटी-माटा की तरह लोग मार रहे है. परिवार के परिवार बर्बाद हो जा रहे है.
इन घटनाओं पर एक नजर, जानिए कितने लोग समय से पहले मारे गए
6 सितंबर 2025: कांटापहाड़ी पैच में लैंड स्लाइड के कारण आउटसोर्सिंग कंपनी की सर्विस वैन खाई में गिर गयी थी. हादसे में सात आउटसोर्सिंग कर्मियों की मौत हुई थी. 31 मार्च 2026: सोनारडीह के टंडाबाड़ी में जमींदोज की घटना में पिता-पुत्री समेत तीन लोगों की मौत हुई थी.23 अप्रैल 2026: टंडाबाड़ी बस्ती में फिर जमींदोज की घटना हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गयी.3 जून 2026: राजाकोठी में भू-धंसान की चपेट में करीब आधा दर्जन आवास आये.7 जुलाई 2026: छाताबाद फुटबॉल मैदान में गोफ के साथ जमीन धंसी और आसपास के घर प्रभावित हुए.4 अगस्त 2026: गोविंदपुर सेलेक्टेड में भू-धंसान से करीब आधा दर्जन घर प्रभावित हुए.7 अगस्त 2026: छाताबाद में दोबारा जमींदोज की घटना हुई. करीब एक दर्जन घर प्रभावित हुए और कई लोग घायल हुए. 26 अगस्त 2026: छाताबाद काजूबगान में बने बड़े गोफ से सती पांडे तालाब भी प्रभावित हुआ.8 सितंबर 2026: सिजुआ तीन पट्टियां में जमींदोज की घटना में सात वर्षीय बालक की मौत हुई, जबकि परिवार के तीन लोग घायल हुए. कई घर भी प्रभावित हुए. 13 सितंबर को रामकनाली में हुई घटना में तीन की गई जान.
